वैशाख अमावस्या पर पुण्य लाभ कमाने को श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाई। तिगरी और ब्रजघाट में गंगा स्नान करने को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गंगा तट हर-हर गंगे उद्घोष से गूंज उठे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद वितरण कर धार्मिक अनुष्ठान कराए।
शनिवार को वैशाख अमावस्या थी। जिस पर गंगा में स्नान करने के लिए आसपास ही नहीं बल्कि दूर दराज के श्रद्धालु तिगरी और ब्रजघाट पहुंचे। पंडित दयानंद शास्त्री, शिवजी महाराज विराजमान मंदिर के पुजारी पंडित हरि गोपाल शास्त्री, आचार्य हृदेश शास्त्री की मानें तो वैशाख अमावस्या पर गंगा में स्नान करने और ब्राह्मणों को दान करने का विशेष महत्व है। इससे पितृ तृप्त होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। इस कारण दूर दराज के श्रद्धालुओं का आधी रात के बाद से ही गंगा स्नान करने के लिए तिगरी व ब्रजघाट पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। भोर होते ही हर हर गंगे के उद्घोष संग पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। स्नान के बाद धार्मिक अनुष्ठान कराए। प्रसाद वितरित किया। दान दक्षिणा देकर पुरोहितों को तृप्त किया। भोर में शुरू हुआ गंगा स्नान का क्रम सुबह काफी देर तक चलता रहा। ब्रजघाट में स्नान के कारण हाईवे पर जाम के हालात बने रहे। वाहन रेंग-रेंग कर गुजरे।