भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने की बात कही। किसानों ने राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन डीएम को सौंपकर किसान हित में कड़ा फैसला लेने की मांग की।
सोमवार को संगठन के जिलाध्यक्ष रामपाल सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कहां कि सरकार के आश्वासन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली बॉर्डर से अपना आंदोलन खत्म किया था। लेकिन इसके बाद सरकार अपने वादों से मुकर रही है। सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। लगातार मांग करने के बाद में भी किसान हित में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 9 दिसंबर 2021 को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल ने किसानों की मांग पर एमएसपी पर एक कमेटी बनाए जाने की बात कही थी। इसके बाद भी सरकार ने कोई कमेटी का गठन नहीं किया है। सरकार द्वारा आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने की बात कही गई थी। बावजूद इसके किसानों पर दर्ज मुकदमा वापस नहीं लिए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने 54 में से 17 केस वापस लेने की बात कही है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं किया है कि कौन से मुकदमे वापस लिए जाएंगे। कहा कि लखीमपुर खीरी कांड में एसआईटी की रिपोर्ट में षड्यंत्र की बात स्वीकार करने के बावजूद भी मुख्य षड्यंत्रकारी अजय मिश्र टोनी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहना संवैधानिक और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। इस बीच पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से हत्याकांड के आरोपी आशीष मिश्र मोनू को जमानत दिला दी गई है। एक प्रमुख गवाह पर हमला होने के बाद भी सरकार द्वारा जमानत के आर्डर पर अपील न करना और गवाहों को सुरक्षा न देना, सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा कर रहा है। जबकि पुलिस द्वारा फंसाए गए किसानों को जमानत नहीं मिल रही है। इस दौरान किसानों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर तत्काल समस्याओं का निराकरण कराने की मांग की है। इस दौरान आलोक कुमार, मुकेश कुमार, राजीव चौधरी, अली जफर, समरपाल सिंह, शीशपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, दीपक सिंह, मनीष, चेतन सिंह, सचिन कुमार आदि मौजूद रहे।