क्षेत्र के सांथलपुर गोशाला में गोवंशीय पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए काऊ कोट व मर्करी लाइट की व्यवस्था नहीं होने से पशु सर्दी से कांप रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
सांथलपुर गोशाला में 207 पंजीकृत व लगभग 50 पशु बिना टैग के हैं। गोशाला में 200 पशुओं के रहने की क्षमता है। पहले सर्दी के मौसम में गोवंशीय पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए काऊ कोट व मर्करी तथा अलाव की व्यवस्था की जाती थी। लेकिन इस बार कड़ाके की सर्दी शुरू होने के बावजूद कोई व्यवस्था जिम्मेदारों द्वारा नहीं की जा रही है। सर्दी लगने से गोवंशीय पशुओं के बीमार होने के बाद मौत हो रही है। बीमार होकर मरने वाले पशुओं का आंकड़ा भी गोशाला में तैनात पशु चिकित्सक के पास नहीं है क्योंकि कर्मचारियों द्वारा पशुओं को मौत के बाद गोशाला परिसर में दफना दिया जाता है। बाबा नोमीदास ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर गोवंशीय पशुओं को सर्दी से मरने से बचाने की मांग की है।
पशु चिकित्सक डाक्टर तेजपाल सिंह ने बताया कि गोशाला को मात्र 75 काऊ कोट उपलब्ध कराये गए हैं जो कि गोशाला में मौजूद पशुओं की संख्या के हिसाब से बहुत कम हैं। अन्य की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है।