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वाह री पुलिस!: न्यायालय में दाखिल जीडी में भी कर दिया ‘खेल’, ऐसे पकड़ में आया दिन और तारीख का हेरफेर

Wed, 20 Apr 2022 07:06 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा

सार

अदालत ने एक मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा जीडी में किए गए हेरफेर को पकड़ा है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए दो पर्चों में से एक को कूटरचित बताया। न्यायालय ने सवाल उठाया है कि मालखाने से निकालने के तीन दिन पहले पुलिस ने बरामद शराब को प्रयोगशाला कैसे भेज दिया। इस पर जिलाधिकारी को मामले की जांच करने को कहा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमरोहा में पुलिस का खेल न्यायाधीश ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान पकड़ लिया। मिलावटी शराब बनाने वाले आरोपी के खिलाफ दाखिल किए गए जीडी (जनरल डायरी) के पर्चों में गलत तथ्य दर्शाए गए। पुलिस ने शराब को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने के तीन दिन बाद माल खाने से निकालना दर्शाया। जबकि माल को प्रयोगशाला भेजने से पहले मालखाने से निकलना होता है। ऐसे न्यायालय ने जीडी में से एक को कूटरचित बताते हुए डीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त कर दिया है।

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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने बताया कि यह मामला नौगांवा सादात थाने से जुड़ा है। 30 अगस्त 2014 को तत्कालीन इंस्पेक्टर महिपाल सिंह तरार, आबकारी निरीक्षक बख्ताबरुल हनीफ अन्य पुलिस कर्मियों के साथ अवैध शराब बनाने और बेचने वाले को खिलाफ अभियान के चलते क्षेत्र में घूम रहे थे। तभी उन्होंने मुखबिर की सूचना पर क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर में इरशाद की दुकान पर छापा मारा था। यहां पुलिस ने इरशाद को रेक्टिफाइड स्पिरिट से मिश्रित शराब बनाने और बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से 20 लीटर मिलावटी शराब मिलने का दावा किया गया था।

इस मामले में इंस्पेक्टर महिपाल सिंह तरारा ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम व अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके बाद इरशाद को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया था। फिलहाल वह जमानत पर जेल से बाहर था। मामला अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अहमद उल्लाह खां की अदालत में विचाराधीन था। इस बीच पुलिस ने अपनी विवेचना पूरी करके आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस दौरान पुलिस ने जीडी के दो पर्चे न्यायालय के सामने प्रस्तुत किए थे। जिसमें पुलिस ने मिलावटी शराब को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की तारीख 12 सितंबर 2014 दर्शाई है। जबकि दूसरे पर्चे में शराब को मालखाने से निकालने की तारीख तीन दिन बाद 15 सितंबर 2014 दर्शाई है।

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ऐसे खुली मामले की पोल
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि बुधवार को न्यायालय ने मामले सुनवाई की और पुलिस द्वारा पेश किए गए दोनों पर्चों में से कोई एक को कूटरचित बताया। न्यायालय का मानना है कि मालखाने से निकालने के तीन दिन पहले पुलिस ने बरामद शराब को प्रयोगशाला कैसे भेज दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि यह कोर्ट को भ्रमित करने के उद्देश्य से किया गया है। इसलिए न्यायाधीश अहमद उल्लाह खां ने जिलाधिकारी को मामले की जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। मामले की जांच दो माह में पूरी करते हुए न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। उधर न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी इरशाद को दोषमुक्त कर दिया है।
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