जबकि उसकी जगह टेक्निकल ग्रेड यूरिया (कॉमर्शियल) को प्रयोग किया जाना था। इतनी बड़ी मात्रा में अनुदानित यूरिया फैक्टरी में कहां से आया, इसके दस्तावेज प्रबंधन से तलब किए गए लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका और न ही दस्तावेज दिखाए जा सके। इस पर फैक्टरी प्रबंधक को अपनी औद्योगिक इकाई में टेक्निकल ग्रेड यूरिया का प्रयोग न करके उसकी जगह अनुदानित यूरिया का प्रयोग करने का दोषी पाया गया। प्रबंधन को बताया गया कि अनुदानित यूरिया का कॉमर्शियल इस्तेमाल उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 का उल्लंघन है। यूरिया के कट्टे कब्जे में लेकर फैक्टरी प्रबंधक के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई। सीओ सिटी विजय कुमार राणा ने बताया कि जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर जीआर सॉल्वेंट एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंधक व अन्य लोगों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
ग्वाला पशु आहार में एक प्रतिशत यूरिया का इस्तेमाल होता है। फैक्टरी में कॉमर्शियल यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कर्मचारियों ने अनुदानित यूरिया भी लाकर रख दिया था, ये गलती हुई है। - अजय टंडन, मालिक, जीआर साल्वेंट एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कैलसा
पशु आहार में प्रोटीन वैल्यू बढ़ाने के लिए एक निश्चित मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। बशर्ते यूरिया का मानक के अनुरूप इस्तेमाल किया जाए। यूरिया मिलाने की अलग-अलग मात्रा है। अगर तय मात्रा के अनुरूप यूरिया मिलाया जाए, तो पशुओं के लिए फायदेमंद होता है। -डॉ ब्रजवीर सिंह, एडिशनल डायरेक्टर पशुपालन विभाग
औद्योगिक इकाइयों में टेक्निकल ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। टेक्निकल ग्रेड यूरिया मतलब कॉमर्शियल, जिसकी बाजार में कीमत करीब 1500 से 3000 प्रति कट्टा तक होती है। जबकि, अनुदानित यूरिया केवल किसानों के लिए होता है। जिसकी कीमत वर्तमान में केवल 266.50 रुपये है। अनुदानित यूरिया का प्रयोग उद्योग इकाइयों में करना प्रतिबंधित है। ऐसा करने वालों पर उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम की कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन रुपए बचाने के लिए औद्योगिक इकाई के मालिक या कर्मचारी अनुदानित यूरिया का इस्तेमाल करते हैं, जो गलत है। - राजीव कुमार, जिला कृषि अधिकारी