कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के बाद डेरे सिमेटते श्रद्धालु।
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तिगरी धाम। तिगरी मेले में कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य के बाद श्रद्धालुओं के वापस लौटने के सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने सूर्योदय होने से पहले ही गंगा में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान कराए। इसके बाद मेले में मिठाइयां, चाट-पकौड़ी खरीदरी कर डेरे समेट घर लौटने का सिलसिला शुरू कर दिया। इसके चलते तिगरी से लेकर कांकाठेर तक वाहनों का रेंग-रेंग कर चलने का सिलसिला जारी रहा।
शुक्रवार को मुख्य स्नान के साथ ही तिगरी मेला संपन्न हो गया। कार्तिक पूर्णिमा पर भोर होते ही लाखों श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के जयघोष के साथ गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। धार्मिक अनुष्ठान कराए। मेले में चाट पकौड़ी और घर के लिए सामान की खरीदारी की। इसके बाद झूलों, मौत का कुआं आदि का लुत्फ उठाने के बाद घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। एकाएक गंगा की रेती में गाढ़े गए तंबुओं को उखाड़ना शुरू कर दिया। घर से लाए जरूरी सामान को समेटना वापस लौटने लगे। मेले में दूसरे जनपदों और दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने अधिकांश सामान को रात में ही पैक कर लिया था। सूर्योदय के साथ ही गंगा में गोता लगाने के बाद खिचड़ी का आनंद लिया और घर की ओर रुख करने लगे। दस दिन तक तंबुओं की नगरी में रहने वाले श्रद्धालु आ अब लौट चलें... के अंदाज में अपने ट्रैक्टर-ट्रालियों, भैंसा बुग्गी, कार आदि वाहनों से अपने गंतव्य की ओर लौटने शुरू कर दिया। दिनभर श्रद्धालुओं का वापस लौटने का सिलसिला चलता रहा।
स्नान के बाद हुए धार्मिक अनुष्ठान
तिगरी धाम। कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरीधाम पर स्नान के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान हुए। सुबह में मेले पहुंचे श्रद्धालुओं ने छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार कराया। इसके बाद हवन में आहुति देकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की गई। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक शिविरों में हवन का आयोजन किया गया। संवाद
अच्छा तो हम चलते हैं...कुछ इस तहर तिगरी धाम गंगा मैय्या को बाय-बाय करते श्रद्धालु।- फोटो : JPNAGAR