अभिनेता अमिताभ बच्चन और राष्ट्रीय लोक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह के खिलाफ चल रहे फर्जीवाड़े और मनी लांड्रिंग के मुकदमे की वापसी पर जिला प्रशासन ने मुहर लगा दी है।
जिलाधिकारी ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि मुकदमा जीतने की संभावना नहीं है। कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका है। फाइनल रिपोर्ट भी लगाई जा चुकी है।
शासन ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर राज्य बनाम अमर सिंह और अमिताभ बच्चन आदि के खिलाफ बाबूपुरवा थाने में दर्ज मुकदमा की वापसी पर 13 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी।
यह मुकदमा फर्जीवाड़ा करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और प्रोबेशन ऑफ मनी लाड्रिंग के तहत दर्ज हुआ था। मामले में 30 मई को जिलाधिकारी दफ्तर से पत्र अभियोजन दफ्तर भेज दिया गया था।
जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष यादव ने डीएम को दी रिपोर्ट में कहा है कि यह मुकदमा जिला जज कोर्ट में चल रहा है। इसमें फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। इसके खिलाफ वादी ने प्रोटेस्ट रिट दाखिल की थी।
कोलकाता पुलिस ने विवेचना वापस कर दी थी। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा को विवेचना दी गई। वादी शिवाकांत त्रिपाठी द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
अभियोजन की सफलता की संभावना अत्यंत क्षीण प्रतीत होती है। अभियोजन की कार्यवाही करना विधि संगत नहीं है। एसएसपी यशस्वी यादव ने 23 जुलाई को इस रिपोर्ट पर आख्या लगाई है।
इसमें कहा गया है कि वह जिला शासकीय अधिवक्ता की रिपोर्ट से सहमत हैं। इस पर डीएम ने अपनी संस्तुति लगाते हुए रिपोर्ट 27 जुलाई को शासन को भेज दी है।
ये था मामला
लेबर कालोनी बाबूपुरवा निवासी शिवाकांत त्रिपाठी ने 15 अक्तूबर 2009 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि राज्यसभा सदस्य अमर सिंह और उनके सहयोगियों ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर सही के रूप में प्रयोग करने और गलत ढंग से धन अर्जित किया। बाद में विवेचना में अभिनेता अमिताभ बच्चन और अन्य लोगों के नाम सामने आए थे।