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एक डॉक्टर के भरोसे सवा लाख की आबादी का इलाज

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04 : भादर : कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। -संवाद - फोटो : AMETHI
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भादर (अमेठी)। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बद से बदतर है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में मरीजों से ज्यादा अस्पतालों को इलाज की जरूरत है। सीएचसी भादर क्षेत्र की करीब सवा लाख आबादी के इलाज की जिम्मेदारी एक चिकित्सक पर है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की क्या दशा है।
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दुआ कीजिए कि घर परिवार में कोई बीमार न पड़ जाए। नहीं तो बीमारी की जांच कराना तो दूर इलाज के लिए चिकित्सक ढूढे़ नहीं मिलेंगे। करीब तीन दशक पूर्व ब्लॉक मुख्यालय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ तो लगा कि अब इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। बावजूद इसके अस्पताल स्थापना से लेकर आज तक व्यवस्था सहीं नहीं हो पाई।
30 शैय्या वाले इस अस्पताल में सिर्फ एक चिकित्सक के सहारे सवा लाख की आबादी का इलाज किया जा रहा है। कभी स्वास्थ्य केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ की तैनाती रहा करती थी।
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इस समय स्वीकृत सात चिकित्सकों में अधीक्षक डॉ. अजय मिश्र को लेकर एक दंत चिकित्सक डॉ. अनवर की ही तैनाती है। डॉ. अभिषेक गुप्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामगंज में बैठते हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वीकृत चार स्टाफ नर्स के सापेक्ष दो की ही तैनाती है। वार्ड ब्वाय के तीन पदों के सापेक्ष एक कार्यरत हैं। तीन फार्मासिस्ट में भी दो की ही तैनाती है तो 17 एएनएम में 13 की पोस्टिंग है।
एक्सरे कक्ष व शल्य कक्ष में लगा है ताला
अस्पताल की दुर्दशा का आलम यह है कि एक्सरे कक्ष में रखी गई एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। कभी शायद किसी का एक्सरे हुआ हो। एक्सरे कक्ष के साथ ही शल्य चिकित्सक कक्ष में भी ताला लटक रहा है।
जांच की भी नहीं व्यवस्था
अस्पताल में पैथालॉजी के लिए कक्ष तो बनाया गया लेकिन बाहर से ही करानी पड़ती है। स्वास्थ्य केंद्र को मिला वाहन कबाड़ हो गया है जो अस्पताल के अंदर पड़ा है। पेयजल के लिए स्वास्थ्य केंद्र परिसर में पानी की टंकी जरूर लगाई गई लेकिन पानी दूषित होने की वजह से उसका उपयोग नहीं किया जाता है। शुद्ध पेयजल के लिए चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मरीजों को दर-दर भटकना पड़ता है ।
आवास हुए जर्जर
चिकित्सक समेत चिकित्सा कर्मियों के लिए परिसर में आवास बनाया गया है। तकरीबन सभी आवास जर्जर हो गए हैं। अपनी जान जोखिम में डालकर चिकित्सा कर्मी आवासों में रह रहे हैं। आवास की मरम्मत दशकों पूर्व से नहीं कराई गई है । यही नहीं घोरहा, भादर, गाजीपुर, भावापुर, ओझा का पुरवा, रतापुर, दहियावां, पीपरपुर, भोजपुर, लहना, मोचवा, अयोध्या नगर, नगरडीह व हारीपुर समेत तीन दर्जन से अधिक गांव के लोग इलाज के अभाव में परेशान हो रहे हैं ।
क्या कहते हैं ग्रामीण
घोरहा निवासी महेश चंद पांडेय कहते हैं की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत बहुत खराब है। कई वर्षों से चिकित्सकों की कमी है। सिर्फ एक चिकित्सक ही किसी तरह मरीजों का इलाज करते हैं। भादर निवासी संतबक्स सिंह कहते हैं की अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं होने से महिला मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार क्षेत्रवासियों ने महिला चिकित्सक की तैनाती की मांग विभागीय अधिकारियों से की लेकिन अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया।
पीपरपुर निवासी रवींद्र प्रताप सिंह के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र पर न तो बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है और न ही सर्जन की। ऐसे में मरीजों को निजी नर्सिंग होम या जिला मुख्यालय के अलावा सुल्तानपुर जाना पड़ता है। रतापुर गांव निवासी मनोज कुमार पांडेय के अनुसार सीएचसी पर चिकित्सक सहित स्वास्थ्य कर्मियों की काफी कमी है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को हर रोज भुगतना पड़ता है।
बेहतर इलाज देने का प्रयास
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय मिश्र चिकित्सक व अन्य स्टाफ की कमी को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि इतनी बड़ी आबादी वाले इलाके में चिकित्सक व स्टाफ नाकाफी हैं। स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनाती के लिए पत्राचार किया गया है। फिलहाल कम संसाधनों में मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है।
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