जगदीशपुर (अमेठी)। खरीफ सीजन में कम बरसात होने से प्रभावित खेती-किसानी को बेहतर बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सरसों की बुआई करने की सलाह दी है।
वैज्ञानिकों के अनुसार अक्टूबर के प्रारंभ में ही बीज शोधन व उर्वरक प्रबंध कर बुआई करने से जहां उत्पादन बढ़ेगा वही फसल में रोग लगने की आशंका भी न्यून्तम होगी। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके आनंद ने सरसों की बुआई को लेकर जारी एडवाइजरी के माध्यम से दी।
उन्होंने बताया कि धान-गेहूं के साथ तिलहनी फसल उत्पादन से किसानों की आय में इजाफा संभव है। बरसात कम होने से अधिकांश किसान जहां धान की रोपाई नहीं कर सके वहीं विभिन्न कारणों से धान की फसल भी नष्ट हो गई है। ऐसे किसान सरसों की बुआई कर अपनी प्रभावित आमदनी को सुधार सकते हैं।
वैज्ञानिक के अनुसार अक्टूबर में खेतों में पर्याप्त नमी होने से अधिक उत्पादन होता है तो फसल में रोग लगने की संभावना भी कम होती है। सरसों के लिए भुरभुरी मिट्टी की जरूरत होती है। इसे लिए किसानों को खरीफ फसलों की कटाई के बाद एक गहरी जुताई के साथ नमी संरक्षण के लिए पाटा लगाना चाहिए।
उत्पादन बढ़ाने के लिए दो से तीन किलोग्राम एजोटोबेक्टर व पीएबी कल्चर को 50 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकल्चर में मिलाकर अंतिम जुताई से पूर्व मिलाना चाहिए।