जगदीशपुर (अमेठी)। जिले में बड़ी संख्या में लोग गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन घरों व सार्वजनिक स्थलों पर मूर्ति व झांकी सजाकर विधि विधान से गणेश की पूजा की जाती है। माना जाता है कि विधि विधान से किए गए पूजन से लोगों की सभी मनोकामना पूरी होती है। शास्त्रों में गणेश को बुद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 10 सितंबर (शुक्रवार) को पड़ रहा है।
गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
पं. अनिल शास्त्री ने बताया कि इस दिन पूजा का शुभ मुहुर्त मध्याह्न काल में है। वैसे तो तिथि की शुरुआत पूर्वाह्न 11:03 बजे से अपराह्न 1:33 बजे तक है। यानि पूजा का मुहूर्त दो घंटे 30 मिनट तक माना गया है। हालांकि इसका शुभ मुहूर्त अपराह्न 12:18 बजे से चतुर्थी तिथि की समाप्ति रात 9:57 बजे तक है।
इस दिन न देखें चंद्रमा
पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से आप पर झूठा आरोप या कलंक लग सकता है। गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी, कलंक चौथ और पत्थर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।
क्यों नहीं देखना चाहिए चंद्रमा
अनिल शास्त्री बताते हैं कि एक बार गणेश जी अपने मूषक पर सवार होकर खेल रहे थे। तभी अचानक मूसकराज को सर्प दिखा। जिसे देख वह भय के मारे उछल पड़े और उनकी पीठ पर सवार गणेश जी का संतुलन बिगड़ गया। गणेश जी ने मुड़कर देखा कि कहीं उन्हें कोई देख तो नहीं रहा है। रात के कारण आसपास कोई मौजूद नहीं था। तभी अचानक जोर जोर से हंसने की आवाज आई। ये आवाज किसी और की नहीं बल्कि चंद्र देव की थी।
चंद्रदेव ने गणपति का उपहास उड़ाते हुए कहा कि छोटा सा कद और गज का मुख। यह सुनते ही गणेश क्रोधित हो उठे और चंद्रमा को श्राप देते हुए कहा कि, जिस सुंदरता के अभिमान के कारण तुम मेरा उपहास उड़ा रहे हो वह सुंदरता नष्ट हो जाएगी। गणेश के श्राप के कारण चंद्रदेव का रंग काला पड़ गया और पूरे संसार में अंधेरा हो गया। तब सभी देवी देवताओं ने मिलकर गणेश को समझाया और चंद्र देव ने अपने कृत्य के लिए माफी मांगी।
चंद्रदेव को क्षमा करते हुए गणेश ने कहा कि मैं अपना दिया हुआ श्राप वापस तो नहीं ले सकता, लेकिन महीने में एक दिन आपका रंग पूर्ण रूप से काला होगा और फिर धीरे धीरे प्रतिदिन आपका आकार बड़ा होता जाएगा। तथा माह में एक बार आप पूर्ण रूप से दिखाई देंगे। कहा जाता है कि तभी से चंद्रमा प्रतिदिन घटता और बढ़ता है। गणेश ने कहा कि गणेश चतुर्थी के दिन जो आपके दर्शन करेगा उसे अशुभ फल की प्राप्ति होगी।