गौरीगंज (अमेठी)। पिछले डेढ़ साल के भीतर जिले में कच्चे मकान व बाउंड्रीवॉल ढहने से 32 लोगों की जान चली गई। लोगों को बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी सो अलग। जिले में बड़ी संख्या में मकान ढहने की घटनाएं सरकारी योजनाओं को आइना दिखा रही हैं।
जिले में बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास बनाए गए हैं। ज्यादातर आवास उन्हें दिए गए हैं जिनके मकान छप्पर के या कच्चे थे। गरीबों को आए दिन समारोह पूर्वक आवासों की चाबी देकर शासन प्रशासन वाहवाही भी बटोर रहा है।
हालांकि पिछले डेढ़ वर्ष में जिले में कच्चे मकान धराशायी होने के आंकड़े धरातल पर इन योजनाओं को आइना दिखा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले डेढ़ वर्ष में जिले की सभी चार तहसीलों में कुल मिलाकर 998 मकान भरभराकर ढह गए। वित्तीय वर्ष 2020-21 में मकान गिरने की 928 घटनाएं हुईं जिनमें 27 लोगों की मौत हुईं।
इन घटनाओं में 56 पशुओं की भी मौत हुई। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक 70 मकान ढह चुके हैं। इन घटनाओं में पांच लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और 13 पशु काल कवलित हुए हैं। एक दिन पहले तिलोई में एक जर्जर दीवार ढहने से तीन बच्चों की मौत ने लोगों को सवाल उठाने पर विवश कर दिया। यह घटना भले ही बाउंड्रीवॉल ढहने से हुई हो लेकिन लोगों के मन में योजनाओं के प्रति सवाल तो उठ ही रहे हैं।