गौरीगंज (अमेठी)। मौसम परिवर्तन के दौरान फैल रहे वायरल फीवर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पैरासिटामॉल दवा तक नहीं है। यह स्थिति तब है जब जिला अस्पताल समेत सभी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित उपचार कराने पहुंचे रहे हैं। अस्पताल में मरीजों को पैरासिटामॉल दवा लिखी जा रही है। अस्पताल में दवा नहीं होने से मरीजों को बाहर से दवा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कोविड संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के पहले जिले में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू बुखार के मरीज भी मिलने लगे हैं। लेकिन आलम यह है कि जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी में प्रतिदिन बुखार पीड़ित उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
सिर्फ जिला अस्पताल में ही प्रतिदिन करीब 300-400 वायरल बुखार पीड़ित पहुंचने से चिकित्सकों के कक्ष में भीड़ उमड़ रही है। जिला अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों की मानें तो अस्पताल पहुंचने वाला हर दूसरा मरीज वायरल बुखार पीड़ित है। पीड़ित को परामर्श देने के बाद चिकित्सक आवश्यक दवा पैरासिटामॉल के साथ एंटीबायटिक व दवाएं लिख रहे हैं।
मरीज दवा वितरण काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां उन्हें आवश्यक पैरासिटामॉल नहीं होने की बात कहते हुए अन्य दवाएं दी जा रही हैं। ऐसे में बुखार से बचाव के लिए मरीजों को पैरासिटामॉल बाहर दुकानों से खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। वायरल बुखार की आवश्यक दवा पैरासिटामॉल की आपूर्ति नहीं होने से जहां शासन-प्रशासन की सक्रियता व बचाव कार्य के हकीकत की पोल खुल रही है वहीं मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कोविड वैक्सीनेशन में हो रही आपूर्ति
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि कोविड संक्रमण के दौरान पैरासिटामॉल की मांग बढ़ी है। वैक्सीनेशन के दौरान अनिवार्य रूप से पैरासिटामॉल दी जा रही है। अस्पताल में मरीजों को असुविधा न हो इसके लिए दो लाख टैब्लेट पैरासिटामॉल की मांग की गई है। जल्द ही आपूर्ति मिलने की संभावना है।
भेजी गई डिमांड : सीएमओ
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल समेत सभी अस्पतालों से पैरासिटामॉल की डिमांड शासन को भेजी गई है। पैरासिटामॉल नहीं होने से उपचार प्रभावित नहीं हो रहा है। पैरासिटामॉल के स्थान पर दूसरी दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं। मरीजों के उपचार में कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था बनाई जा रही है।