जलालपुर। आजादी की लड़ाई में जलालपुर तहसील क्षेत्र के शेखूपुर गांव का नाम इतिहास के पन्नों में अमर करने वाले श्रीराम को कभी भुलाया नहीं जा सकता। न सिर्फ उनके गांव के बल्कि आसपास के गांवों के लोग गर्व से उनका नाम लेते हैं और आजादी की लड़ाई में योगदान की सराहना करते हैं। अंग्रेजी हुकूमत को उन्होंने कई मौकों पर कड़ी चुनौती दी थी। अंग्रेजों की नाक में दम करने वाले श्रीराम को कई बार जेल की हवा खानी पड़ी थी। मालीपुर रेलवे स्टेशन के पास तार काटकर संचार व्यवस्था ठप करने की घटना में उन्होंने करीब 12 माह की सजा भी काटी थी।
जलालपुर तहसील क्षेत्र के शेखूपुर गांव निवासी श्रीराम का नाम आते ही आज भी युवाओं के अंदर देश प्रेम की भावना उमड़ने लगती है। लगभग 90 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके श्रीराम शारीरिक अस्वस्थता के चलते अब कुछ बोल नहीं पाते है। पिछले काफी दिनों से वे बेड पर ही पड़े हैं। अमर उजाला टीम ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर मुलाकात की तो परिवारीजनों ने गर्व से देश की आजादी की लड़ाई में श्रीराम के योगदान की चर्चा की। कहा कि अक्सर वे परिवारीजनों व गांव के युवाओं से आजादी की लड़ाई की दास्तां बयां करते थे।
अंग्रेजी हुकूमत के सिपाहियों व कर्मचारियों की पिटाई करने आदि के चलते कई-कई दिन तक उन्हें भूखे पेट छिपना पड़ा था। आजादी की लड़ाई से जुड़े होने वाले सम्मेलनों में शामिल होने के लिए वह कई मील पैदल ही चले जाते थे। आजादी की लड़ाई के दौरान उन्हें कई बार हवालात में रातें गुजारनी पड़ीं। मालीपुर रेलवे स्टेशन के पास तार काटने की घटना में उन्हें एक वर्ष की सजा भी हुई थी। सजा काटकर लौटने के बाद भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ। वे लगातार आजादी की लड़ाई में सक्रिय रहे। युवा आज भी श्रीराम के आजादी की लड़ाई में किए गए योगदानों को याद कर देश प्रेम से ओतप्रोत हो जाते हैं।