फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रसोई घर बदहाल, मिट्टी के चूल्हे पर बनता खाना

विज्ञापन
अंबेडकरनगर के गदायां कंपोजिट स्कूल में चूल्हे पर बनता एमडीएम। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। स्कूलों में कहीं मिट्टी के चूल्हे पर धुएं के बीच मिड-डे मील बन रहा था तो कहीं रसोई घर की हालत बदहाल दिखी। कहीं भोजन बनाने के लिए लगा हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है तो कहीं सीलनयुक्त रसोई में एमडीएम बनाया जा रहा है। शनिवार को अमर उजाला टीम ने विभिन्न विकासखंडों में स्थित परिषदीय विद्यालयों का जायजा लिया तो कुछ इस तरह की तस्वीर सामने आई। जायजा लेने के दौरान ही रसोइयों का दर्द भी उभरकर सामने आया, जिसमें उन्हें बीते पांच माह से मानदेय नहीं मिल सका है। जुलाई व अगस्त को छोड़कर उन्हें बीते पांच माह में नियमानुसार तीन माह का मानदेय अब तक मिल जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। बिना मानदेय के भी रसोइयों की ओर से भोजन बनाने की जिम्मेदारी का निर्वहन किया जा रहा है। रसोइयों ने कहा कि वे सब पूरे परिश्रम से साफ सुथरा भोजन बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन विभाग को लंबे समय से उनका भुगतान करने की सुध नहीं है। अमर उजाला टीम ने एमडीएम का जायजा लिया तो एक बात मुख्य तौर पर यह देखने को मिली कि सभी विद्यालयों में एमडीएम साफ सफाई व मेन्यू के अनुसार बनाया जा रहा था।
विज्ञापन

दूषित पानी दे रहा हैंडपंप, कैसे शुद्ध बने एमडीएम
प्राथमिक विद्यालय विजयगांव में टीम पहुंची तो वहां शनिवार को पूर्वाह्न एमडीएम बनता मिला। मेन्यू के अनुसार सब्जी व चावल बन रहा था। कुल पंजीकृत 50 बच्चों में से यहां 38 नौनिहाल पहुंचे थे। भोजन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए रसोई गैस सिलेंडर पर बनता मिला। दो रसोइया यहां तैनात हैं। उन्होंने मानदेय न मिलने का दर्द बयां किया। पता चला कि परिसर में एक मात्र हैंडपंप लगा है। वह दूषित पानी दे रहा है। इस बारे में विभाग को सूचित भी किया जा चुका है। इसी दूषित पानी से भोजन बनाने का कार्य कई बार जल्दबाजी में हो जाता है, जबकि वैकल्पिक प्रबंध के तहत थोड़ी दूर स्थित एक निजी हैंडपंप का सहारा भी मिलता रहता है।
कंपोजिट विद्यालय गदाया में गैस चूल्हा खराब
अकबरपुर नगर क्षेत्र के परिषदीय कंपोजिट विद्यालय गदाया में शनिवार को अमर उजाला टीम पहुंची तो दोपहर का भोजन बन रहा था। यहां रसोई गैस सिलेंडर तो भरा हुआ था, लेकिन उसका चूल्हा खराब था। नतीजा यह कि मिट्टी के चूल्हे पर धुएं के बीच रसोइये एमडीएम बना रहे थे। यहां कुल पंजीकृत 255 छात्र-छात्राओं में से 130 बच्चे पहुंचे थे। चार रसोइया की यहां तैनाती है। वे सभी मौजूद थीं। उन्होंने टीम से अपना दुखड़ा बताते हुए कहा कि मानदेय न मिल पाने से घर कर खर्च चलना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन

रसोई घर की दीवारों में सीलन
प्राथमिक विद्यालय वाजिदपुर में टीम पहुंची तो मेन्यू के अनुुसार सब्जी व चावल बना हुआ था। कुल पंजीकृत 144 बच्चों में से 60 छात्र पहुंचे थे। यहां भोजन तो रसोई गैस चूल्हे पर बन रहा था, लेकिन रसोई घर की हालत अत्यंत खराब मिली। दीवारों में सीलन देखने को मिली, जबकि कुछ बर्तन का अभाव भी यहां था। यहां बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर भोजन करते मिले। भोजन को लेकर बच्चों ने संतुष्टि दिखाई।
जर्जर रसोई घर में बन रहा था मिड-डे मील
टीम ने एमडीएम का जायजा लेने के लिए प्राथमिक विद्यालय टेमा का रुख किया तो वहां भोजन बनाया जा रहा था। रसोइया मजदूर भोजन बनाने में तल्लीन थीं। हालांकि रसोई घर अत्यंत जर्जर मिला। दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है तो वहीं कई जगह दीवार व छत चटक गई है। दीवारों पर सीलन भी देखने को मिली। यहां भोजन मेन्यू के अनुसार ही बन रहा था। कुल 101 बच्चों में से 60 नौनिहाल यहां मौजूद मिले।
इन विद्यालयों में बढ़िया मिला मिड-डे मील
टीम कटेहरी विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय अहिरौली कंपोजिट पहुंची तो वहां सब कुछ चाक चौबंद मिला। मध्याह्न भोजन करके हैंडपंप के पास मिले बच्चों ने बताया कि यहां भोजन अत्यंत अच्छे ढंग से मिल रहा है। जलालपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय शाहपुर फिरोजपुर तथा प्राथमिक विद्यालय कन्नूपुर, बसखारी विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय कोतूपुर, टांडा विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय डैयाडीह, अकबरपुर के प्राथमिक विद्यालय अफजलपुर में व्यवस्था दुरुस्त रही। यहां सब कुछ बेहतर ढंग से होता पाया गया।
फैक्ट फाइल
कुल प्राथमिक विद्यालय- 1062
उच्च प्राथमिक विद्यालय- 239
कंपोजिट विद्यालय- 383
कुल रसोइया मजदूर- 4982
रसोई घरों को साफ रखने का निर्देश
एमडीएम का संचालन सभी परिषदीय विद्यालयों में हो रहा है। रसोई घरों को साफ सुथरा रखने के निर्देश हैं। जरूरत के अनुरूप आगे मरम्मत कराई जाएगी। बच्चों को नियमित रूप से शुद्ध भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें जिले को अच्छी प्रगति हासिल है। यह तय होगा कि यह व्यवस्था आगे और भी बेहतर हो।
विज्ञापन

-भोलेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें