अंबेडकरनगर। थाने में न्याय पाने के लिए गई किशोरी रहम की भीख मांगती रही, लेकिन दरोगा जी नहीं पसीजे। वह गई तो थी थाने के मुखिया के पास न्याय मांगने, लेकिन न्याय देने की बजाय एसओ ने पूरे पुलिस महकमे को कलंकित करने वाली घटना को अंजाम दे दिया। यह निष्कर्ष किशोरी के उन बयानों से निकल कर सामने आ रहा है, जो उसने अपने वीडियोयुक्त बयान व अधिकारियों से की लिखित शिकायत में की है। किशोरी के बयानों को सच माना जाए तो वह एसओ से यह कहकर खुद को उसके चंगुल से बचाने की कोशिश करती रही कि वह उसकी बेटी की उम्र की है। इसके बाद भी दरोगा ने अश्लीलता की हदें पार कर दीं।
अपहरण व दुष्कर्म की शिकार किशोरी ने पुलिस को लेकर जो बयान दिया है, वह निश्चित रूप से अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक है। पुलिस सूत्रों के अनुसार हालांकि किशोरी का अपहरण नहीं हुआ था। वह अपने प्रेमी के साथ गई थी। इससे पहले भी वह एक बार घर से जा चुकी थी। पुलिस का कहना है कि इस बार जब वह लौटी तो परिवार के सदस्य उसे घर में रखने को राजी नहीं थे। परिवारीजनों को थाने बुलवाकर समझाया गया। किशोरी को भी सख्त हिदायत दी गई। इसके बाद वह परिवार के सदस्यों के साथ घर गई। इस मामले में अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर आरोपी युवक के विरुद्घ केस भी दर्ज करा दिया। इसी बीच विवेचना व बयान आदि की प्रक्रिया के दौरान किशोरी ने अपने साथ अश्लील हरकत करने का आरोप एसओ राजेसुल्तानपुर नीरज कुमार पर लगाकर सनसनी फैला दी। किशोरी का एक वीडियो भी वायरल हुुआ है।
इसमें वह यह कहती हुई सुनी जा रही कि जब एसओ मेरे साथ अश्लील हरकत कर रहे थे, तब मैंने उनसे बचने के लिए यह तक कहा कि मैं आपकी बेटी जैसी हूं। इसके बाद भी एसओ नहीं पसीजे। किशोरी ने मीडिया कर्मियों व परिवारीजनों को बताया कि एसओ ने न्याय देने की बजाय मानसिक व शारीरिक दोनों तरह का उत्पीड़न किया। एसओ ने यह कहकर भी अपमानित किया कि तुम तीन दिन उस लड़के के साथ रहकर आई हो। दुष्कर्म के मामले में कार्रवाई करने की बजाय एसओ ने युवक के साथ तीन दिन तक रहने व रात गुजारने की बात कहकर उपहास उड़ाया। किशोरी ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि एसओ ने यह भी कहा कि तुमने तीन रात उसके साथ गुजारी हो तो एक रात मेरे साथ भी गुजारो।
किशोरी ने कहा कि वह हाथ जोड़ती रही। गिड़गिड़ाती रही, लेकिन एसओ ने उससे छेड़छाड़ की। उधर, आरोपों के बाद लाइन हाजिर किए गए एसओ नीरज ने कहा कि आरोप पूरी तरह फर्जी हैं। परिवार के सदस्य दो बार अधिकारियों से मिल चुके थे। उसी दौरान की फर्जी घटना का उल्लेख हो रहा है। यदि वास्तव में घटना हुई होती तो अधिकारियों व किसी अन्य तक भी बात पहुंची होती। कुछ लोगों के उकसावे में किशोरी व उसके परिवारीजनों की ओर से मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।