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बच्चों को दिलाएं बेहतर तालीम

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अंबेडकरनगर। किसी भी समाज व देश का उत्थान तभी हो सकता है, जब शत प्रतिशत साक्षरता हो। सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि उसके साथ बेहतर संस्कार की भी आवश्यकता है। इस्लाम में इल्म व संस्कार पर अधिक जोर दिया गया है। कहा गया है कि जो जाहिल होता है, उसका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है। यह बातें वरिष्ठ शिया धर्मगुरू मौलाना सै. मोहम्मद अब्बास ने कही। वे बुधवार देर शाम इमाम बारगाह में आयोजित मजलिस को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम में तालीम व संस्कार पर अधिक जोर दिया गया है। कहा गया है कि तालीम हासिल करने के लिए यदि सात समुंदर पार भी जाना पड़े, तो जरूर जाएं। हम सभी की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को बेहतर तालीम दें। इसके साथ ही उन्हें बेहतर संस्कार भी दें। दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी जरूर दें। ऐसा करने से ही समाज व देश का विकास तेजी से हो सकेगा। मौलाना ने कहा कि आखिरी रसूल हजरत मोहम्मद मुस्तफा ने कहा था कि मैं इल्म का शहर हूं और हजरत अली उसका दरवाजा हैं। अब इसी से अंदाजा लगा लें कि इस्लाम में इल्म को कितना अधिक जोर दिया गया है।
मौलाना अब्बास ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ शहादत देकर इस्लाम को कयामत तक के लिए अमर कर दिया। कर्बला में शहीद होने वालों में छह माह के जहां हजरत अली असगर थे, तो वहीं 72 वर्ष के हबीब इब्रे मजाहिर भी थे। बाद में उन्होंने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से चर्चा कर माहौल को भावुक बना दिया। मजलिस के बाद अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। इस दौरान रजा अनवर, हसन अब्बास, आरिफ अनवर, डा. आमिर, इम्तियाज हुसैन आदि मौजूद रहे।
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