अंबेडकरनगर। जिले की सीएचसी में मरीजों को रात में इलाज मिल पाना भगवान भरोसे है। कहीं पर कर्मचारी नदारद मिलेंगे तो कहीं पर सोते हुए कर्मचारियों को जगा पाना आसान नहीं होता। रात में कोई विशेष दिक्कत होने पर जब मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचते हैं तो प्राय: इलाज की बजाए निराश होकर वापस ही लौटना पड़ता है। ले देकर सिर्फ जिला चिकित्सालय का ही सहारा रहता है, जहां पर आकस्मिक सेवाओं का लाभ मरीजों को मिल पाता है। सीएचसी में रात्रिकालीन चिकित्सा सेवा को बेहतर करने की तमाम कोशिशें जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही। रात होते ही अस्पताल कर्मियों व चिकित्सकों की मनमानी और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें रात के समय प्रशासनिक अधिकारियों के किसी संभावित निरीक्षण का आमतौर पर कोई डर नहीं रहता। नतीजा यह होता है कि अफसरों के सोते ही अस्पतालों में मरीजों का इलाज हो पाना कठिन हो जाता है। मरीजों व तीमारदारों से मिल रही तमाम शिकायतों का संज्ञान लेते हुए अमर उजाला टीम ने तय किया कि आधी रात के बाद सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं का मौका मुआयना किया जाएगा। इसी क्रम में एक दिन पहले सोमवार रात को अमर उजाला टीम ने अकबरपुर व टांडा सीएचसी तथा जिला अस्पताल का भ्रमण किया। उम्मीद के अनुरूप जिला अस्पताल में तो इमरजेंसी सेवा सुचारु ढंग से संचालित होती मिली, लेकिन दोनों सीएचसी में चिकित्सकों व कर्मचारियों की हद दर्जे की लापरवाही व मनमानी सामने आई। पेश है रिपोर्ट-
एक्सीडेंट की लगती रही गुहार, सोते रहे कर्मचारी
सीन-1 स्थान- सीएचसी टांडा, समय 12 बजकर 35 मिनट
अमर उजाला टीम सोमवार आधी रात के बाद टांडा नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। परिसर में प्रवेश करने के बाद सीएचसी के मुख्य भवन के बाहर एक कार खड़ी दिखाई दी। इससे यह प्रतीत हुआ कि चिकित्सक समेत कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद हैं। टीम भवन के गेट तक गई तो वहां पूरी तरह से सन्नाटा पसरा था। न तो कोई चिकित्सक था और न ही कोई कर्मचारी दिखा। आवाज लगाने पर भी जब कोई उत्तर मिला तो टीम ने अंदर प्रवेश किया। वहां एक कक्ष में लगे मरीजों वाले बेड पर दो कर्मचारी सोते मिले। उन्हें कक्ष के बाहर से ही आवाज दी गई। लेकिन कोई हरकत नहीं हुई। कई आवाज लगाने के बाद टीम कक्ष के अंदर पहुंची। वहां कर्मचारियों को यह कहकर जगाने का प्रयास हुआ कि एक युवक का एक्सीडेंट हो गया है, उसे तत्काल इलाज की जरूरत है। दोनों कर्मचारियों का हाथ पकड़कर उठाने का प्रयास हुआ। उन्होंने नींद में ही कुछ बड़बड़ाया इसके बाद भी वे सब उठने की स्थिति में नहीं थे। उन्हें फिर बताया गया कि एक्सीडेंट की चलते युवक की हालत अत्यंत खराब है। लेकिन इसका भी कोई असर उन पर नहीं हुआ। दोनों कर्मचारी गहरी नींद में थे या फिर न जगने का कोई और कारण था यह तो पता नहीं चल पाया, लेकिन उन दोनों की ही न तो आंख खुली और न ही उन्होंने कोई उत्तर दिया। अमर उजाला टीम इसके बाद बाहर निकल आई। कोई 10 मिनट बाद टीम एक बार फिर उसी कक्ष में पहुंची। दोनों कर्मचारी अब भी एक ही बेड पर सो रहे थे। दोबारा उन्हें जगाने की कोशिश हुई। इस बार भी वे सब नहीं जग पाए।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में नहीं मिली अव्यवस्था
सीन-2 स्थान-जिला अस्पताल, समय 2 बजकर 5 मिनट
अमर उजाला टीम टांडा से लौटकर जिला अस्पताल पहुंची। यहां इमरजेंसी कक्ष के सामने तमाम तीमारदार दिखाई दिए। टीम सीधे इमरजेंसी वार्ड में गई तो वहां कोई अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। वार्डों में भर्ती किए गए मरीजों को देखने के बाद चिकित्सक डॉ. योगेश विश्राम कक्ष में फार्मासिस्ट शैलेंद्र त्रिपाठी के साथ मौजूद मिले। चिकित्सक ने बताया कि जो भी मरीज यहां आ रहे हैं, उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। टीम ने बाद में भर्ती मरीजों से मिलकर वार्ता की तो उन्होंने भी किसी प्रकार की अव्यवस्था न होने की जानकारी दी। इमरजेंसी कक्ष से बाहर आने पर कई तीमारदार भी वहां मौजूद मिले। एक तीमारदार राकेश से पूछा गया कि वे अपने मरीज को यहां तक कैसे लेकर पहुंचे। अस्पताल आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई। तीमारदार ने इस पर बताया कि एंबुलेंस के जरिए अपने मरीज को लेकर यहां तक आया हूं। किसी किस्म की कोई दिक्कत नहीं हुई।
सीएचसी का गेट बंद कर नदारद थे कर्मचारी
सीन-3 स्थान-सीएचसी अकबरपुर, समय 2 बजकर 25 मिनट
अमर उजाला टीम ने अकबरपुर नगर के अयोध्या रोड स्थित सीएचसी का जायजा लिया तो वहां टांडा सीएचसी से भी ज्यादा मनमानी देखने को मिली। सीएचसी का मुख्य गेट बंद था। बाहर अंधेरे का साम्राज्य था। अंधेरा इतना था कि कोई बुजुर्ग मरीज रात में आए तो वह लड़खड़ाकर गिर भी सकता है। ऐसे में परिसर में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर किए जाने की भी जरूरत महसूस हुई। टीम अस्पताल भवन के अंदर पहुंची तो वहां सफाई आदि तो बेहतर थी, लेकिन सन्नाटा पसरा था। आवाज लगाने पर भी किसी कर्मचारी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। टीम ने भवन का विधिवत जायजा लिया तो एक भी कक्ष में न तो कोई चिकित्सक मिला और न ही कोई कर्मचारी। अमर उजाला टीम लगभग 15 मिनट तक अस्पताल परिसर व भवन के अंदर घूमती रही, लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। जाहिर तौर पर ऐसी दशा में यदि कोई मरीज यहां पहुंचेगा तो उसका इलाज कैसे संभव हो सकेगा। कई बार रात में मरीज जैसे तैसे सीएचसी तक पहुंच पाते हैं। यहां इलाज के लिए चिकित्सक व फार्मासिस्ट न मिलने पर ही उन्हें पैदल ही जिला अस्पताल तक की दौड़ लगानी पड़ती है। सोमवार रात जिस तरह सीएचसी अकबरपुर लावारिस हालत में पड़ी रही, उससे यहां कोई अनहोनी भी घट सकती है। कोई भी असामजिक तत्व यहां बेरोकटोक परिसर व भवन में प्रवेश कर किसी भी अवांछनीय गतिविधि को अंजाम दे सकता है।
बेहतर हो रात में इलाज की सुविधा
नागरिकों ने कहा है कि रात के समय इलाज के बेहतर प्रबंध होने चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष सिंह, सप्रिय गोयल व राजकुमार सोनी ने कहा कि रात के समय सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज के चाक चौबंद प्रबंध होने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा। यह स्थिति चिंताजनक है। इसमें तत्काल सुधार की जरूरत है। युवा व्यवसायी अमित बंका व लालजी चतुर्वेदी ने कहा कि दिन में तो निजी अस्पतालों में इलाज मिल जाता है, लेकिन रात में सिर्फ सरकारी अस्पतालों का सहारा होता है। ऐसे में रात के समय सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधा सुनिश्चित की जाए। लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों व कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। विमल तिवारी, योगेंद्र बहादुर सिंह, रणजीत गुप्त, राजेश सिंह व आलोक त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में रात के समय पूरी तरह मनमानी रहती है। सीएचसी व पीएचसी में रात के समय इलाज के बेहतर प्रबंध होने चाहिए। इसमें जो भी लापरवाही बरते, उस पर कठोरतम कार्रवाई हो।
जारी किया जाएगा नोटिस
सभी सीएचसी में आकस्मिक सेवा के तहत इलाज के प्रबंध हैं। कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है। चिकित्सकों को आन कॉल आना होता है। रात में कोई भी मरीज आए तो उसे वापस न लौटना पड़े यह सुनिश्चित करना सीएचसी की जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही व मनमानी क्षम्य नहीं है। संबंधित को नोटिस जारी कर जवाब लिया जाएगा। समुचित जवाब न आया तो कार्रवाई सुनिश्चित होगी। -डॉ श्रीकांत शर्मा, सीएमओ
अंबेडकरनगर में सन्नाटे में डूबी टांडा सीएचसी- फोटो : AMBEDKAR NAGAR