अंबेडकरनगर। जिले के डेढ़ हजार प्राथमिक विद्यालय छात्र-छात्राओं की मौजूदगी से बुधवार को एक बार फिर गुलजार दिखे। तमाम सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में बच्चों का भव्य ढंग से स्वागत हुआ। कहीं चंदन व रोली लगाई गई, तो कहीं फूल भेंट किए गए। कई विद्यालयों को गुब्बारे व झालर आदि से सजाया गया था। सैनिटाइज करने की प्रक्रिया निजी विद्यालयों में ही मुख्य रूप से देखने को मिली, लेकिन तमाम परिषदीय विद्यालयों में भी शिक्षकों ने यह प्रबंध कर रखा था। लंबे अर्से बाद विद्यालय पहुंचे बच्चे काफी उत्साहित दिखे।
बच्चों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए जरूरी प्रबंध किए गए थे, लेकिन तमाम परिषदीय विद्यालयों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला देखने को मिला। बरसात का मौसम होने के बावजूद जलनिकासी को लेकर जरूरी ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि दर्जनों विद्यालय परिसर जलमग्न रहे, तो वहीं विद्यालय पहुंचने वाले रास्तों पर भी पानी भरा रहने से छात्र-छात्राओं को पानी से होकर विद्यालय आना जाना पड़ा। परिषदीय विद्यालयों में शौचालयों की साफ सफाई भी बेहतर ढंग से नहीं हो सकी थी।
चंदन लगाकर हुआ स्वागत
केस एक
स्थान-प्राथमिक विद्यालय कोरझा
कोरोना प्रोटोकॉल के बीच पंजीकृत 250 छात्र-छात्राओं की तुलना में 107 छात्र-छात्राओं को मुख्य गेट पर पहले चंदन लगाया गया, फिर थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद सभी को मास्क लगाकर ही विद्यालय में प्रवेश करने दिया गया। शिक्षण कक्ष में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। प्रधानाध्यापिका माधुरी ने बताया कि विद्यालय में कुल 250 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। पहले दिन 107 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इसमें कक्षा 1 में 42 की तुलना में 28, कक्षा 2 में 20 की तुलना में 13, कक्षा 3 में 43 की तुलना में 20, कक्षा 4 में 79 की तुलना में 25 व कक्षा 5 में 66 की तुलना में 21 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। बताया कि एमडीएम योजना के तहत तहरी बनाई गई थी।
विद्यालय परिसर में जलभराव से हुई परेशानी
केस दो
स्थान-प्राथमिक विद्यालय कोटवा महमदपुर
विद्यालय परिसर में पानी भरा हुआ था। नतीजा यह रहा कि विद्यालय में जाने वाले दो तीन छात्र-छात्राएं कीचड़ में गिर पड़े। इसके चलते उन्हें घर लौटना पड़ा। प्रधानाध्यापिका सीमा वर्मा ने बताया कि विद्यालय में 115 छात्र-छात्राओं की तुलना में 80 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिक्षण कक्ष में छात्र-छात्राएं कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शिक्षा हासिल किया। छात्र-छात्राएं मास्क लगाए हुए थे। जिन्होंने मास्क नहीं लगा रखा था, उन्हें मुख्य गेट पर ही मास्क को उपलब्ध कराया गया। एमडीएम योजना के तहरी बनी हुई थी। बताया कि विद्यालय में बाउंड्रीवाल नहीं है। इससे आवारा पशुओं का बरामदे में अक्सर बसेरा रहता है। इतना ही नहीं, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से परिसर में जलभराव रहता है, जिससे बारिश होने पर धुटने तक पानी में घुसकर अंदर जाना पड़ता है।
एमडीएम में बच्चों को मिली तहरी
केस तीन
स्थान-प्राथमिक विद्यालय उकरा
अमर उजाला टीम प्राथमिक विद्यालय उकरा पहुंची, तो वहां पढ़ाई होती मिली। प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार ने बताया कि 176 छात्र-छात्राओं की तुलना में 93 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। बताया कि कक्षा में 1 में 32 की तुलना में 22, कक्षा 2 में 32 की तुलना में 20, कक्षा 3 में 48 की तुलना में 22, कक्षा 4 में 32 की तुलना में 15 तथा कक्षा 5 में 32 की तुलना में 15 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। बताया कि विद्यालय में प्रवेश करने से पहले छात्र-छात्राओं को पूरी तरह से सैनिटाइज किया गया था। एमडीएम योजना के तहत तहरी बनी हुई थी।
पानी से होकर विद्यालय पहुंचे छात्र
केस चार
स्थान-प्राथमिक विद्यालय तिरवाही
अमर उजाला टीम जब प्राथमिक विद्यालय तिरवाही पहुंची, तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गई। परिसर के बाहर से लेकर अंदर तक पानी भरा हुआ था। छात्र-छात्राएं इसी पानी से होकर विद्यालय में प्रवेश करते दिखे। विद्यालय में पंजीकृत 70 छात्र-छात्राओं की तुलना में उपस्थित 35 छात्र-छात्राओं ने नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि जब भी बारिश होती है, तो कई दिनों तक परिसर में पानी भरा रहता है, जिससे उसी में से होकर गुजरना पड़ता है। प्रधानाध्यापक अजीत वर्मा ने बताया कि परिसर में पानी भरा होने की जानकारी उन्होंने खण्ड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह को दी। इस पर खण्ड शिक्षा अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया, लेकिन विद्यालय परिसर की भौगोलिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि पानी को बाहर निकाला जा सके।
कोरोना प्रोटोकॉल का कराया गया पालन
शासन के दिशा निर्देशानुसार शिक्षण कार्य के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया गया। विद्यालय में प्रवेश से पहले छात्र-छात्राओं को सैनिटाइज किया गया, जबकि जिन्होंने मास्क नहीं लगा रखा था, उन्हें विद्यालय में ही मास्क की उपलब्धता कराई गई। कहीं से किसी भी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई। -भोलेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए