अंबेडकरनगर। कृषि कानून के विरोध में सोमवार को जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के निकट धरना दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषि कानून किसानों के हित में कतई नहीं है। इससे किसान पूंजीपतियों का बंधक बन जाएगा। यह कानून पूंजीपतियों को लाभ दिलाने के लिए है। किसानों के हित को देखते हुए इस कृषि कानून को जल्द वापस लिया जाए। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही कृषि कानून को वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अध्यक्षता कर रहे जिला सलाहकार हरिगोपाल मौर्य ने कहा कि केंद्र सरकार खुद को किसानों का हितैषी होने का दावा तो बढ़-चढ़कर करती है, लेकिन कृषि कानून लाकर किसानों को पूंजीपतियों का बंधुआ मजदूर बना रही है। कहा कि यह कानून पूरी तरह पूंजीपतियों को लाभ दिलाने के लिए है। इस कानून से किसान मेहनत कर फसल तो तैयार करेंगे, लेकिन उपज के मूल्य का निर्धारण वह स्वयं नहीं कर सकेंगे। किसानों के हित को देखते हुए अविलंब कृषि कानून को वापस लिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि किसान विभिन्न मुश्किलों से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
कहा गया कि छुट्टा जानवर खेतों में खड़ी फसल को नष्ट कर रहे हैं, लेकिन जानवरों को पुश आश्रयस्थल पर ले जाने की सुध नहीं ली जा रही है। पशु आश्रयस्थलों की भी दशा अत्यंत दयनीय है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। बाद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया। इस मौके पर प्रमोद कुमार, गुलाम अहमद, राजीव वर्मा, संदीप कुमार, पिंटू, विनय कुमार, लालमन आदि मौजूद रहे।