अंबेडकरनगर। बालिका को झाड़फूंक के बहाने भगा ले जाने व दुष्कर्म करने के दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम फरीदा बेगम ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर अलग अलग धाराओं में 35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। कहा कि अर्थदंड की 70 प्रतिशत रकम पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिया जाएगा। जुर्माने की रकम न अदा करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में एक व्यक्ति नेे हंसवर थाने में अपनी नाबालिग पुत्री को भगा ले जाने के मामले में केस दर्ज कराया था। बताया था कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री की तबियत खराब रहती थी। झाड़फूंक कराने में मदद करने की बात कहकर हंसवर थाना क्षेत्र के साबुकपुर निवासी पवन कुमार उर्फ अज्जली सिंह उसे व उसकी पुत्री को अपनी कार से प्रतापगढ़ ले गया था। उसे एक स्थान पर उतार दिया, और कहा कि वह उसकी बेटी को ले जा रहा है, और झाड़फूंक कराकर ले आएगा। परंतु काफी इंतजार के बाद वह उसकी पुत्री को लेकर वापस नहीं लौटा।
पुलिस ने मामले में अपहरण सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। बाद में पुलिस ने मामले में दुष्कर्म की भी धारा बढ़ा दी। इस बीच मामला सत्र परीक्षण के लिए अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम फरीदा बेगम के समक्ष पेश हुआ। न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर पवन कुमार उर्फ अज्जी सिंह को घटना का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर अलग अलग धाराओं में 35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। आदेश में कहा कि अर्थदंड की 70 प्रतिशत रकम पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिया जाए। कहा कि यदि अर्थदंड की रकम न अदा की गई तो दोषी को एक वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।