अमर उजाला से बातचीत में योगी सत्यम ने कहा है कि प्रयागराज में तैनात एक पुलिस अफसर और महंत नरेंद्र गिरि के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन था। ऐसे में उनकी हत्या किए जाने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
योगी सत्यम का कहना है कि उक्त पुलिस अफसर के भूमिका भी जांच होनी चाहिए। योगी सत्यम ने कहा कि जो व्यक्ति अपना दस्तखत तक नहीं कर सकता था, वो भला आठ पेज का सुसाइड नोट कैसे लिखेगा। यह भी अपने आप में एक अहम और बड़ा सवाल है। योगी सत्यम का मानना है कि महंत नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है।
उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की है। बता दें कि पिछले कुंभ में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की अगुवाई में फर्जी साधु-संतों के खिलाफ एक अभियान चलाया गया था। उस लिस्ट में स्वामी योगी सत्यम भी थे। फर्जी साधु संतों की लिस्ट में नाम होने के कारण स्वामी योगी सत्यम का शिविर कुंभ मेले में नहीं लग पाया था।
इसे लेकर किए गए सवाल पर स्वामी योगी सत्यम का कहना था कि क्रियायोग आश्रम को नष्ट करने की साजिश रची गई थी। हमें देश से बाहर भेजने की कूट रचना रची गई थी। पर मैं तभी सत्य के मार्ग पर था और आज भी सत्य के मार्ग पर हूं। बोले कि इसके बावजूद मैने हमेशा महंत नरेंद्र गिरि का भला चाहा।
आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य और उनकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे आनंद गिरि को लेकर किए गए सवाल पर स्वामी योगी सत्यम ने कहा कि आनंद गिरि को छुड़ाने में उन्होंने मदद की थी। सिडनी में तैनात एक एसपी के माध्यम से आनंद गिरि को जमानत दिलवाई थी। कहा कि आनंद गिरि के कृत्य से बाहर भारत की बदनामी हो रही थी। इसलिए वह आनंद गिरि की मदद को आगे आए।