इलाहाबाद। दार्जिलिंग की तरफ से आ रही हिमालय की ठंडी हवाओं ने मौसम की चाल बदल दी है। पुरवइया के दाब से नमी के कारण अचानक लुढ़के पारे से रात के तापमान में गिरावट आई है। हवा में ठंडी सुरसुरी गर्मी से राहत दिलाने के लिए काफी है। मौसम का मिजाज स्थायी नहीं है। पारा जैसे ही 42 डिग्री के आसपास पहुंचेगा सूरज का ताप बढ़ेगा। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा का कहना है कि ताप बढ़ने से मध्य गंगा के मैदान में नम हवाओं का दाब पश्चिम से आने वाले धूल भरे तूफान का रास्ता साफ करेगा।
मौसम का पिछले पांच दिन से हर दिन बदल रहा मिजाज गर्मी से राहत दिला रहा है। पुरवइया के दबाव में पारा हर दिन लुढ़क रहा है। 44 डिग्री छूने को आतुर पारा लुढ़ककर रविवार को 39 डिग्री पर अटक गया। न्यूनतम तापमान भी 22 डिग्री से कुछ अधिक पर अटक गया। पुरवइया की तेज चाल सूरज की तपिश से राहत दिलाती रही। जब कभी हवा का दाब कम हुआ तो सूरज ने आंखें तरेर गर्मी का एहसास कराया।
पारा लुढ़कने का कारण जम्मू-कश्मीर के साथ हिमाचल की बर्फबारी और बारिश रही। अब वहां की हवाओं का ही असर है कि हर दिन नई ऊंचाइयों को छू रहा पारा सुस्त हो गया। पुरवइया के कमजोर पड़ते ही गंगा के तटीय इलाकों में ताप बढ़ाएगा। इस दशा में पश्चिम से धूल भरी तूफानी हवाएं यहां मौसम का रुख एक बार फिर बदल सकती हैं। मौसम विज्ञानी प्रो. ओझा के मुताबिक इस तरह तापमान के बढ़ने-घटने से आंधी-तूफान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह स्थिति किसानों के लिए कष्टदायी होगी। इस समय किसान कटाई-मड़ाई में व्यस्त हैं। अधिकांश फसल खलिहानों में पड़ी है।