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जंगे आजादी : और कनपटी पर गोली मारकर शहीद हो गए आजाद

Fri, 06 Aug 2021 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • मुखबिर से अल्फ्रेड पार्क में होने की सूचना पर अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया था
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prayagraj news : चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंजाब और बंगाल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के दो मुख्य केंद्र थे और बंगाल से पंजाब या पंजाब से बंगाल जाने के लिए इलाहाबाद से होकर गुजरना लाजिमी था। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का इलाहाबाद से गहरा नाता रहा। वह राम प्रसाद बिस्मिल और भगत सिंह सरीखे क्रांतिकारियों के अन्यतम साथियों में से थे। 23 जुलाई 1906 को अलीराज पुर स्टेट के भावरा नामक स्थान पर जन्मे चंद्रशेखर का कार्यक्षेत्र इलाहाबाद था। वह कई बार यहां आए, रुके और अंतत: यहीं पर शहीद हो गए। वह अंग्रेजों के खिलाफ लगातार षड़यंत्र करते, योजनाएं बनाते थे और तमाम प्रयासों के बावजूद अंग्रेजों के साथ नहीं आ सके थे। कहते हैं, आजाद को पहचानने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने सात सौ लोगों को नौकरी पर लगा रखा था।
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आजाद सजा-ए-मौत पाए तीनों साथियों-भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की सजा रुकवाने के लिये उन दिनों जेल में बंद गणेश शंकर विद्यार्थी से मिलने आए थे। विद्यार्थी जी की सलाह पर इलाहाबाद आए चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारियों के आर्थिक सहयोग के लिए आनंद भवन भी गए थे। मोतीलाल नेहरू क्रांतिकारियों को आर्थिक सहयोग करते थे और उनके बाद जवाहर लाल नेहरू ने भी यह परंपरा जारी रखी। इसीलिए इलाहाबाद आने के बाद चंद्रशेखर आजाद जवाहर लाल नेहरू से मिलने आनंद भवन भी गए थे। क्रांतिकारियों को सहयोग के लिए मिली धनराशि चिंतामणि घोष के पास रखी जाती थी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष और कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो.हेरंब चतुर्वेदी कहते हैं, आनंद भवन से लौटने के बाद चंद्रशेखर आजाद तत्कालीन अल्फ्रेड पार्क में चिंतामणि घोष की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह 27 फरवरी 1931 का दिन था। मुखबिरों से आजाद के अल्फ्रेड पार्क में होने की सूचना अंग्रेजों को मिल गई और थोड़ी ही देर में आजाद एकाएक पुलिस की ओर से घेर लिए गए।
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हालांकि चारों ओर फैले सिपाहियों ने वह कई घंटे तक लड़ते रहे लेकिन जब उनकी पिस्तौल में एक गोली बची तो अपनी कनपटी पर मारकर वह शहीद हो गए। तब उनकी उम्र महज चौबीस वर्ष की थी। आजाद की शहादत की खबर शहर में पहुंची तो छात्रों की भीड़ जुलूस की शक्ल में नारे लगाती हुई अल्फ्रेड पार्क पहुंच गई लेकिन वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। हालांकि शहर में कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन हुए। यह देश में चल रही लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव था सो घटना को लेकर शहरियों में जबर्दस्त गुस्सा था।
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