कई और दिग्गजों को खानी पड़ी मात
संगमनगरी से सांसद चुने गए इन नेताओं के खिलाफ बाहर से आए कई प्रमुख दिग्गजों ने दावेदारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इनमें डॉ.राम मनोहर लोहिया, कांशीराम, डॉ.सोनेलाल पटेल, कौशलेंद्र सिंह पटेल जैसे नाम शामिल हैं। डॉ.लोहिया ने पं.जवाहर नेहरू के खिलाफ 1962 में चुनाव लड़ा था, लेकिन हार मिली।
कांशीराम ने 1988 में इलाहाबाद व 1996 में फूलपुर सीट से दावेदारी की, लेकिन दोनों ही चुनाव में पीछे रह गए। अपना दल के संस्थापक डॉ.सोनेलाल पटेल ने भी भाग्य आजमाया, लेकिन जीत नहीं मिली। वाराणसी के महापौर रहे कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2018 में फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव में सपा के नागेंद्र पटेल से हार मिली। भाजपा टिकट पर 2009 में करण सिंह पटेल भी फतेहपुर से आकर चुनाव लड़े थे, लेकिन जीत नहीं मिली। हालांकि, करण सिंह का प्रयागराज में भी आवास है।
संगमनगरी में सीखी राजनीति, दूसरे जिले में भी बने सांसद
संगमनगरी में भले ही बाहरी नेताओं को लोकसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं हुई,लेकिन यहां के कई दिग्गजों ने बाहर जाकर परचम लहराया है। कई नेता तो यहां भी सांसद रहे और दूसरे जिले में भी जाकर जीत हासिल की। पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह इलाहाबाद और फूलपुर लोकसभा सीट के अलावा फतेहपुर से भी सांसद रहे। पूर्व प्रधानमंत्री के पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री इलाहाबाद के अलावा फतेहपुर से भी सांसद चुने गए।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजनीति तो प्रयागराज में सीखी, लेकिन पिता पं.जवाहर लाल नेहरू की सीट फूलपुर से बुआ विजयलक्ष्मी पंडित के चुनाव लड़ने की वजह से वह रायबरेली चली गईं। इलाहाबाद से तीन बार सांसद रहे डॉ.मुरली मनोहर जोशी कानपुर व वाराणसी से भी निर्वाचित हुए। इसी तरह से हेमवती नंदन बहुगुणा इलाहाबाद के अलावा लखनऊ, श्यामा चरण गुप्ता इलाहाबाद के अलावा बांदा से सांसद चुने गए। केंद्र में मंत्री व राज्यपाल रहीं राजेंद्र कुमारी बाजपेई सीतापुर से सांसद चुनी गई थीं।