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प्रयागराज : मतदाताओं ने बाहरियों पर नहीं जताया भरोसा, डॉ.लोहिया, कांशीराम जैसे नेताओं को भी खानी पड़ी मात

Fri, 29 Mar 2024 11:08 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Lok Sabha Chunav : प्रयागराज की दोनों सीट फूलपुर और इलाहाबाद में अब तक कुल 39 बार सांसद चुने गए हैं, लेकिन बाहर से चुनाव लड़ने वाले किसी भी नेता को जीत हासिल नहीं हुई। छोटे लोहिया के नाम से पहचान बनाने वाले जनेश्वर मिश्र मूलत: बलिया के जरूर रहे, लेकिन 16 वर्ष की उम्र से ही यहीं के होकर रह गए। बसपा के संस्थापक कांशीराम के अलावा अपना दल के अध्यक्ष सोनेलाल पटेल को भी हार का सामना करना पड़ा।
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राम मनोहर लोहिया और कांशीराम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 बदलते सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए निर्वाचित नेताओं की सीट बदले जाने का शोर भी खूब सुनाई दे रहा है, लेकिन प्रयागराज में यह प्रयोग झटका दे सकता है। जनप्रतिनिधियों के चुनाव के मामले में प्रयागराज के मतदाताओं को अपनों पर ही भरोसा है। यहां तक कि देश की राजनीति की दिशा बदलने वाले डॉ.राम मनोहर लोहिया, कांशीराम जैसे दिग्गज नेताओं को भी जीत हासिल नहीं हुई।

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प्रयागराज की दोनों सीट फूलपुर और इलाहाबाद में अब तक कुल 39 बार सांसद चुने गए हैं, लेकिन बाहर से चुनाव लड़ने वाले किसी भी नेता को जीत हासिल नहीं हुई। छोटे लोहिया के नाम से पहचान बनाने वाले जनेश्वर मिश्र मूलत: बलिया के जरूर रहे, लेकिन 16 वर्ष की उम्र से ही यहीं के होकर रह गए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति शुरू करके संसद तक पहुंचे। हालांकि, उन्हें भी शुरुआती चुनावों में हार मिली।

अमिताभ बच्चन भी मुंबई से सिर्फ यहां चुनाव लड़ने के लिए आए थे, लेकिन उनके पिता डॉ.हरिवंश राय बच्चन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। अमिताभ का बचपन भी यहीं बीता था। इनके अलावा सांसद चुने जाने वालों पं.जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, श्रीप्रकाश, पुरुषोत्तम दास टंडन विश्वनाथ प्रताप सिंह, डॉ.मुरली मनोहर जोशी, हेमवतीनंदन बहुगुणा, विजया लक्ष्मी पंडित, हरिकृष्ण शास्त्री, कमला बहुगुणा, कृष्ण प्रकाश तिवारी, रामपूजन पटेल, बीडी सिंह, सरोज दुबे, जंग बहादुर पटेल, रेवती रमण सिंह, श्यामा चरण गुप्ता, धर्मराज पटेल, कपिल मुनि करवरिया, अतीक अहमद, केशव प्रसाद मौर्य, केशरी देवी पटेल, डॉ.रीता बहुगुणा जोशी, नागेंद्र प्रताप पटेल शामिल रहे। इनकी जन्म और कर्मभूमि प्रयागराज ही रही है।

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कई और दिग्गजों को खानी पड़ी मात


संगमनगरी से सांसद चुने गए इन नेताओं के खिलाफ बाहर से आए कई प्रमुख दिग्गजों ने दावेदारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इनमें डॉ.राम मनोहर लोहिया, कांशीराम, डॉ.सोनेलाल पटेल, कौशलेंद्र सिंह पटेल जैसे नाम शामिल हैं। डॉ.लोहिया ने पं.जवाहर नेहरू के खिलाफ 1962 में चुनाव लड़ा था, लेकिन हार मिली।

कांशीराम ने 1988 में इलाहाबाद व 1996 में फूलपुर सीट से दावेदारी की, लेकिन दोनों ही चुनाव में पीछे रह गए। अपना दल के संस्थापक डॉ.सोनेलाल पटेल ने भी भाग्य आजमाया, लेकिन जीत नहीं मिली। वाराणसी के महापौर रहे कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2018 में फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव में सपा के नागेंद्र पटेल से हार मिली। भाजपा टिकट पर 2009 में करण सिंह पटेल भी फतेहपुर से आकर चुनाव लड़े थे, लेकिन जीत नहीं मिली। हालांकि, करण सिंह का प्रयागराज में भी आवास है।
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संगमनगरी में सीखी राजनीति, दूसरे जिले में भी बने सांसद


संगमनगरी में भले ही बाहरी नेताओं को लोकसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं हुई,लेकिन यहां के कई दिग्गजों ने बाहर जाकर परचम लहराया है। कई नेता तो यहां भी सांसद रहे और दूसरे जिले में भी जाकर जीत हासिल की। पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह इलाहाबाद और फूलपुर लोकसभा सीट के अलावा फतेहपुर से भी सांसद रहे। पूर्व प्रधानमंत्री के पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री इलाहाबाद के अलावा फतेहपुर से भी सांसद चुने गए।


पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजनीति तो प्रयागराज में सीखी, लेकिन पिता पं.जवाहर लाल नेहरू की सीट फूलपुर से बुआ विजयलक्ष्मी पंडित के चुनाव लड़ने की वजह से वह रायबरेली चली गईं। इलाहाबाद से तीन बार सांसद रहे डॉ.मुरली मनोहर जोशी कानपुर व वाराणसी से भी निर्वाचित हुए। इसी तरह से हेमवती नंदन बहुगुणा इलाहाबाद के अलावा लखनऊ, श्यामा चरण गुप्ता इलाहाबाद के अलावा बांदा से सांसद चुने गए। केंद्र में मंत्री व राज्यपाल रहीं राजेंद्र कुमारी बाजपेई सीतापुर से सांसद चुनी गई थीं।
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