गंगा में बढ़ते प्रदूषण और खुले नालों से बिना शोधित पानी गंगा में सीधे गिराए जाने के मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने सोमवार को कई स्थानों से गंगा में गिराए जा रहे नालों के पानी का नमूना एकत्र किया। इन नमूनों को कोर्ट के निर्देशानुसार आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू भेजा गया है ताकि पानी की गुणवत्ता की जांच हो सके।
हाईकोर्ट ने की पूर्णपीठ ने गत दिनों गंगा में सीधे गिराए जा रहे नालों के पानी की जांच आईआईटी से कराकर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। नमूने एकत्र करने के लिए कोर्ट ने गंगा प्रदूषण याचिका के एमिकस क्यूरी अरुण गुप्ता के नेतृत्व में एक कमेटी भी गठित की है।
कमेटी के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण गुप्ता, विजय चंद्र श्रीवास्तव, मुख्य स्थायी अधिवक्ता जेएन मौर्या, राजेश त्रिपाठी, मनु धिल्डियाल तथा एडीएम सिटी मदन कुमार के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम ने राजापुर, पोंगहट के अलावा कई एसटीपी पर जाकर नामूने एकत्र किए। टीम ने गंगा किनारे पांच सौ मीटर की परिधि में कोर्ट की रोक के बावजूद हो रहे अवैध निर्माणों का भी जायजा लिया। अरुण गुप्ता ने बताया कि एकत्र किए गए नमूनों को जांच के लिए आईआईटी कानपुर और बीएचयू भेजा गया है। याचिका की सुनवाई 12 नवंबर को होगी। उस मौके पर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।