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UP Election 2022 : टिकट बंटवारे में जातीय संतुलन के दांव पर बसपा को भरोसा

Wed, 12 Jan 2022 02:21 PM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

पांचवीं बार सत्ता की मलाई खाने के लिए सर्द हवाओं में पसीना बहाने में जुटे बसपा के रणनीतिकार। पार्टी सुप्रीमो मायावती की सोशल इंजीनियरिंग और कैडर वोटों की बदौलत चुनावी बैतरनी पार करने की तैयारी।
 
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बहुजन समाज पार्टी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टिकट बंटवारे में जातीय संतुलन और बहन मायावती की सोशल इंजीनियरिंग के बूते इस बार बसपा चुनावी बैतरनी पार करने की तैयारी में है। चुनाव के एलान के बाद पार्टी के सेक्टर प्रभारी से लेकर बूथ कमेटियों के कैडर तक मायावती के नेतृत्व में गठित पिछली सरकारों के सुशासन और जन कल्याण के एजेंडे को गांव-गांव पहुंचाने में जुट गए हैं। यूपी में चार बार सत्ता की मलाई चख चुकी बसपा इस बार बाजी पलटने के लिए सर्द हवाओं के बीच जमकर पसीना बहा रही है।

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अब तक के जातीय सम्मेलनों और कैडर वोटरों के बीच धुआंधार बैठकों के आधार पर कहा जा रहा है कि बीएसपी अपनी सोशल इंजीनियरिंग की बदौलत 2007 का इतिहास दोहराने की तैयारी में है। पार्टी ने फिलहाल प्रयागराज की सभी सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। सोशल इंजीनयरिंग के फॉर्मूले पर अमल करते हुए एक बार फिर से बीएसपी ने टिकटों का बंटवारा किया है।

जिले की पांच सीटों पर ब्राह्मणों को टिकट
जिले की 12 विधानसभा सीटों में से पांच पर ब्राह्मण, तीन पर दलित, तीन पर पिछड़ा और एक सीट पर मुसलमान उम्मीदवार को टिकट देकर जातीय संतुलन को साधने की कोशिश की गई है। जिलाध्यक्ष अभिषेक गौतम का कहना है कि तीर्थनगरी में भाईचारे के आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा। बहन मयावती की सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति पर पार्टी को भरोसा है। उनका कहना है कि बहन  मायावती के मजबूत नेतृत्व और सुशासन देने की क्षमता की वजह से बीएसपी के साथ कैडर वोटरों के अलावा अन्य जातियां भी खड़ी हैं।

वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव में बसपा 11 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। शहर दक्षिणी से जहां नंद गोपाल गुप्ता नंदी पहली बार हाथी के टिकट पर विधायक चुने गए थे, वहीं शहर पश्चिम से पूजा पाल चुनी गई थी। जबकि शहर उत्तरी से हर्षवर्धन बाजपेयी महज 1700 वोट से कांग्रेस के अनुग्रह नारायण सिंह से पराजित हुए थे।
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दो विधायकों ने दे दिया है इस्तीफा

इसके अलावा झूंसी से प्रवीण पटेल,सोरांव से मुस्तफा सिद्दीकी, मेजा सुरक्षित से राजबली जैसल, करछना से कलेक्टर पांडेय, हंडिया से राकेशधर त्रिपाठी बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बहुमत मिल गया, लेकिन बसपा जनाधार वाली पार्टी बनी रही। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने बीएसपी को झटका दे दिया और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के आगे बसपा का सफाया हो गया।

हालत यह हुई कि पिछले विस चुनाव में सिर्फ हंडिया और प्रतापपुर दो सीट पर ही बीएसपी की जीत हुई। लेकिन, इस बार पार्टी पिछले चुनावों से सबक लेते हुए किला फतह करने के लिए आगे बढ़ रही है। चुनाव के एलान से पहले कई विधायकों के दूसरे दलों में जाने को लेकर बीएसपी के रणनीतिकारों का कहना है कि बसपा मजबूती से लड़ेगी। कुछ विधायकों के पार्टी छोड़कर जाने से पार्टी के वोटरों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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