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सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ : बीएड परीक्षा में दूसरे की जगह परीक्षा दे रही युवती समेत तीन गिरफ्तार

Fri, 06 Aug 2021 09:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में एसटीएफ ने दूसरे की जगह परीक्षा दे रही एक युवती समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया एक आरोपी शिक्षक बताया जा रहा है।
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prayagraj news : बालेंद्र सिंह और दीक्षा (सॉल्वर गैंग)। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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बीएड प्रवेश परीक्षा केदौरान शुक्रवार को शहर में सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। एसटीएफ ने हंडिया पीजी कॉलेज में दूसरे की जगह पर परीक्षा देते सॉल्वर युवती दीक्षा उर्फ नेहा समेत गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पकड़ा गया दूसरा आरोपी बालेंद्र सिंह पटेल सॉल्वर गिरोह का सक्रिय सदस्य है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने का ठेका लेता था। मुकदमा दर्ज कराकर दोनों को हंडिया पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।

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एसटीएफ अफसरों के मुताबिक, परीक्षा में सॉल्वर बैठने की सूचना पर हंडिया पीजी कॉलेज में छापा मारा गया। यहां कोरांव के पचेदा गांव निवासी ऊषा देवी की जगह पर दीक्षा उर्फ नेहा परीक्षा देती मिली। पूछताछ में पता चला कि वह सॉल्वर गिरोह की सदस्य है। जिसके बाद उसकी निशानदेही पर परीक्षा केंद्र केबाहर मौजूद गिरोह के एक और सदस्य बालेंद्र सिंह पटेल को गिरफ्तार किया गया।

इनके कब्जे से ओएमआर शीट, बुकलेट समेत अन्य सामान बरामद हुए। थाने लाकर पूछताछ में पता चला कि पकड़ी गई नेहा मूल रूप से फतेहपुर के सालेपुर, सठिगंवा, थाना चांदपुर की रहने वाली है। वर्तमान में वह लोनी, गाजियाबाद में एक निजी बैंक में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत है। उधर शंकरगढ़ के भडिवार गांव के रहने वाले बालेंद्र ने बताया कि वह शंकरगढ़ में स्थित शांति देवी इंटर कॉलेज में हिंदी और संस्कृत का शिक्षक है। साथ ही एलआईसी एजेंट का भी काम करता है। 

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परीक्षा
50 हजार एडवांस, परीक्षा पास होने पर दो-पांच लाख
एसटीएफ अफसरों के मुताबिक, नेहा ने पूछताछ में बताया कि वह पिछले कई सालों से गिरोह से जुड़ी है। पहले वह प्रयागराज में ही रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थी। इसी दौरान वह धर्मेंद्र सिंह यादव व बालेंद्र के संपर्क में आई। बाद में पता चला कि दोनों सॉल्वर गिरोह संचालित करते हैं, जिसके बाद वह उनसे जुड़कर सॉल्वर के रूप में काम करने लगी। यह भी बताया कि एडवांस के तौर पर उसे 50 हजार जबकि परीक्षा पास करने पर दो से पांच लाख तक मिलते थे। इससे पहले वह टीईटी, सुपरटेट, सीटेट व बीएड में भी सॉल्वर के रूप में बैठ चुकी है।

अभ्यर्थियों से छह से 15 लाख तक वसूली
उधर पूछताछ में बालेंद्र ने एसटीएफ को बताया कि वह गिरोह के एक अन्य सदस्य धर्मेंद्र सिंह पटेल संग मिलकर लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने का काम कर रहा है। इसकेलिए अभ्यर्थियों से छह से 15 लाख रुपये तक वसूले जाते हैं। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि  पकड़े गए दोनों आरोपियों के साथ ही मूल अभ्यर्थी केखिलाफ हंडिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। 
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