आयोग की 15 जून 2015 की परीक्षा समिति की बैठक में तय हुआ कि अगर अभ्यर्थी को 125 अंक मिल रहे हैं और शॉर्ट हैंड टेस्ट में आठ फीसदी तक गलती है तो अभ्यर्थी उपलब्ध न होने की स्थिति में आयोग अपने विशेषाधिकारी का इस्तेमाल करते हुए अतिरिक्त तीन फीसदी गलती को अनुमन्य करते हुए ऐसे अभ्यर्थियों को भी मौका देगा। साथ ही जो अभ्यर्थी न्यूनतम 119 अंक पाते हैं, उन्हें भी आठ फीसदी तक गलती होने पर तीसरे चरण की परीक्षा कंप्यूटर टेस्ट के लिए क्वालीफाई करा दिया जाएगा। इसी विशेषाधिकार की आड़ में भर्ती में धांधली हुई।
जांच में सामने आया है कि आयोग ने 1244 अभ्यर्थियों को तीसरे चरण के लिए क्वालीफाई कराया, जिनमें से 913 अभ्यर्थियों को न्यूनतम 125 अंक मिले थे और शॉर्ट हैंड टेस्ट में पांच फीसदी या इससे कम गलतियां थीं और 331 अभ्यर्थियों को 119 से 125 अंक मिले थे और शॉर्ट हैंड टेस्ट में आठ फीसदी तक गलतियां थीं। सीबीआई ने सवाल उठाए हैं कि जब पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार न्यूनतम 125 अंक पाने वाले और अधिकतम पांच फीसदी गलती करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त थी तो बाकी 331 अभ्यर्थियों को क्वालीफाई कराने का कोई औचित्य नहीं था। ऐसे में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ ने आयोग द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन किया।