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हाईकोर्ट : पुराने भूमि अधिग्रहण कानून पर नहीं लागू होंगे नए कानून के उपबंध

Sat, 13 Mar 2021 12:47 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिगृहीत भूमि पर नए अधिग्रहण कानून 2013 के उपबंध लागू नहीं होंगे। यदि भूमि का अधिग्रहण पुराने कानून के तहत किया गया है तो उसमें नए कानून के प्रावधानों के तहत राहत की मांग नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि पुराने कानून के तहत अधिग्रहीत भूमि पर अब तक कब्जा न लिए जाने के आधार को नए अधिग्रहण कानून की धारा 24(2) के अंतर्गत कालातीत (लैप्स) नहीं कराया जा सकता।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि 1979 में अधिगृहीत जमीन के कुछ हिस्से का उपयोग न किए जाने के आधार पर भूमि को मुक्त करने का कोई उपबंध नहीं है। कोर्ट याची को भूमि का मुआवजा लेने की अर्जी देने की छूट दी है। मगर इस आधार पर अधिग्रहीत भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश देने से इंकार कर दिया है कि उस भूमि का न तो कब्जा लिया गया है और न ही याची को मुआवजा मिला है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति एसके पचौरी की खंडपीठ ने कलावती व अन्य की याचिका पर दिया है।

याची का कहना था कि राज्य सरकार ने 1979 में आवास विकास परिषद एक्ट के तहत प्रयागराज के झूंसी कोहना गांव की जमीन झूंसी भूमि विकास एवं गृह स्थान योजना-2 इलाहाबाद के लिए अधिगृहीत की। इसमें शहर पर आबादी के दबाव को कम करने के लिए आवासीय भवन बनाए गए। सह खातेदार शांती देवी ने उसी समय आपत्ति की थी।
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सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर रोक लगाते हुए याची को भी निर्माण करने से रोक दिया। यह याचिका आठ अगस्त 7 को खारिज हो गई। कोर्ट ने याची को अथॉरिटी से संपर्क करने की छूट दी। नया अधिग्रहण कानून  2013 लागू होने के बाद  याचिका दाखिल कर धारा 24(2) के तहत पुराने अधिग्रहण को मुआवजा न देने व कब्जा न लेने के आधार पर अधिग्रहण मुक्त करने की मांग की। कहा कि अधिग्रहण लैप्स हो चुका है। कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना।
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