फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीडीएफ अपलोड कराने वालों की संख्या हुई आधी

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की स्नातक तृतीय वर्ष की द्वितीय परीक्षा और एलएलबी एवं बीएएलएलबी के नियमित छात्रों की मुख्य परीक्षा के दूसरे दिन 100 छात्रों ही अपनी उत्तर पुस्तिका की पीडीएफ जेके इंस्टीट्यूट में जाकर अपलोड कराई। परीक्षा के पहले दिन 200 परीक्षार्थियों ने इंस्टीट्यूट जाकर पीडीएफ अपलोड कराई थी।
विज्ञापन

मंगलवार को हुई परीक्षा में सभी 1600 परीक्षार्थियों को शामिल होना था। सभी परीक्षार्थियों को अपनी उत्तर पुस्तिका की पीडीएफ पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। जो परीक्षार्थी पीडीएफ अपलोड नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे परीक्षार्थियों को विश्वविद्यालय के जेके इंस्टीट्यूट में जाकर पीडीएफ अपलोड कराने की अतिरिक्त सुविधा प्रदान की गई है। सोमवार को 200 परीक्षार्थी जेके इंस्टीट्यूट पहुुंचे थे और इनमें से ज्यादातर परीक्षार्थी सीधे कॉपी लेकर आए थे। ऐसे में इंस्टीट्यूट में उनकी कॉपियों को स्कैन करने के बाद पीडीएफ तैयार की गई और इसके बाद पीडीएफ को अपलोड किया गया। इसमें काफी वक्त लगा। इन परीक्षार्थियों को इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने मॉक टेस्ट के माध्यम से पीडीएफ तैयार करने और उसे अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया।
मंगलवार को हुई परीक्षा में इसका असर देखने को मिला और जेके इंस्टीट्यूट में जाकर पीडीएफ अपलोड कराने वाले परीक्षार्थियों की संख्या आधी रह गई। इविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को ज्यादातर परीक्षार्थी पीडीएफ तैयार करके लाए थे। जो परीक्षार्थी कॉपी लेकर पहुंचे थे, उनकी कॉपियों की पीडीएफ इंस्टीट्यूट में तैयार की गई और मॉक टेस्ट के जरिये ऐसे परीक्षार्थियों को प्रशिक्षण भी दिया गया। उम्मीद है कि आगे होने वाली परीक्षाओं में यह संख्या घटती जाएगी और ज्यादातर परीक्षार्थी पीडीएफ पोर्टल पर खुद अपलोड करेंगे।
विज्ञापन

छात्रों ने वेबसाइट में गड़बड़ी के आरोप लगाए
प्रयागराज। दिशा छात्र संगठन ने इविवि की ऑनलाइन परीक्षा में वेबसाइट पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। इस मसले पर दिशा छात्र संगठन की ओर से मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के धर्मराज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही का नमूना यह है कि परीक्षा शुरू कराने से पहले यह देखा भी नहीं गया कि छात्र स्मार्ट फोन से वेबसाइट को एक्सेस कर सकते हैं या नहीं। इसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में छात्रों को जेके इंस्टीट्यूट तक जाना पड़ रहा है। जो छात्र प्रयागराज से बाहर है, वे कहां जाएंगे। मांग की गई कि जिन छात्रों की परीक्षा छूट गई है, उन्हें दोबारा मौका दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें