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Umesh Pal Hatyakand : महीनों पहले रच दी गई थी उमेश की हत्या की साजिश, शूटरों को था बस समय का इंतजार

Sun, 05 Mar 2023 04:08 AM IST
विनोद सिंह त्रिलोकी यादव, प्रयागराज

सार

उमेश पाल की हत्या की रूपरेखा महीनों पहले बन गई थी। करीब दो महीने पहले उमेश के घर के आसपास कुछ संदिग्ध लोग घूमते दिखे थे। उमेश जब भी कहीं बाहर से घर आते, संदिग्ध लोग आसपास ही दिखते।
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Prayagraj News : उमेश पाल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उमेश पाल की हत्या की रूपरेखा महीनों पहले बन गई थी। करीब दो महीने पहले उमेश के घर के आसपास कुछ संदिग्ध लोग घूमते दिखे थे। उमेश जब भी कहीं बाहर से घर आते, संदिग्ध लोग आसपास ही दिखते। जब लगातार तीन दिन तक उमेश ने ऐसे लोगों को देखा तो थाने से लेकर अधिकारियों तक प्रार्थनापत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई। इसके बाद ही उनकी सुरक्षा में दूसरे सिपाही को भी तैनात कर दिया गया। इससे पहले सिर्फ एक ही सिपाही की तैनाती थी।

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उमेश पाल की हत्या की साजिश महीनों पहले रच दी गई थी। कातिलों को सिर्फ मौके का इंतजार था। जान के खतरे के कारण उमेश वैसे भी घर से कम ही निकलते थे, लेकिन जब भी निकलते, उनकी निगाह आसपास होती। क्योंकि वे अतीक को जानते थे कि अपने दुश्मनों से निपटने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है। करीब दो महीने पहले शाम का समय था। उमेश कहीं से अपने घर आए। उन्होंने देखा कि कुछ लोग आसपास खड़े हैं।

Prayagraj News : माफिया अतीक अहमद और उमेश पाल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
शिकायत पर पहुंची थी थाने की पुलिस
कोई मोबाइल पर बात कर रहा था तो कोई खरीदारी। लेकिन, सबकी निगाहें उमेश की ओर लगी थीं। वर्षों से खतरा झेलते-झेलते उमेश की आंखें पारखी हो गई थीं। वह तुरंत भांप गए कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा। इसके बाद वह अगले दिन फिर बाहर निकले तो उन्हीं लोगों को देखा। तीसरे दिन भी कुछ लोग खड़े थे। इसके बाद उन्होंने थाने में जाकर सूचना दी। थाने की एक जीप तुरंत मौके पर गई भी लेकिन कोई नहीं मिला।

उमेश ने यह बात न सिर्फ पुलिस अधिकारियों के साथ साझा की बल्कि अपने खास दोस्तों और वकीलों को भी बताया। सबने राय दी कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रार्थनापत्र दें। अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया गया। उमेश की सुरक्षा में सिपाही राघवेंद्र को लगा दिया गया। सिपाही संदीप करीब छह महीने से उमेश के साथ थे। दो सिपाहियों के होने बाद भी उमेश उस घटना के बाद से कम ही निकलते थे।

Prayagraj News : शूटरों की वायरल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
घर से गारद न हटी होती तो बच सकती थी उमेश की जान

जान के खतरे को देखते हुए उमेश पाल को घर में आठ सिपाहियों की गारद मिली थी। सभी सिपाही इंसास रायफल से लैस थे। गली में घर होने के कारण दो सिपाही बाहर उसी जगह कुर्सी लगाकर बैठे रहते थे, जहां कातिलों ने वारदात को अंजाम दिया। गारद हटने के बाद उमेश ने स्थानीय अधिकारियों से लेकर लखनऊ में बैठे तमाम अधिकारियों को गारद वापस दिलाने के लिखा था, लेकिन उनके खतरे को गारद के लायक नहीं माना गया। झलवा में रहने वाले उमेश के एक जिगरी दोस्त बताते हैं कि अगर घर में गारद होती, तो दोस्त उमेश आज जिंदा होता।

Prayagraj News : उमेश पाल की हत्या का सीसीटीवी फुटेज। - फोटो : अमर उजाला।
उमेश के पास डीबीबीएल और पत्नी के पास था रायफल का लाइसेंस

उमेश के पास डीबीबीएल गन का लाइसेंस था। उनकी पत्नी जया पाल के पास रायफल का लाइसेंस है। घर में दो लाइसेंसी असलहे थे, लेकिन उमेश इसका प्रदर्शन करने या कहीं ले जाने में हिचकते थे।
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Prayagraj News : उमेश पाल हत्याकांड का सीसीटीवी फुटेज। - फोटो : अमर उजाला।
अचानक हमले से पुलिस को नहीं मिला मौका, नहीं तो एक दो को तो टपका ही देते
पिछले माह 24 फरवरी को उमेश पाल हत्याकांड में शहीद हुए पुलिस के दो जवानों की शहादत की चर्चा हर तरफ हो रही है। दो जवानों के शहीद होने पर लोग उनके शौर्य को तो सलाम कर ही रहे हैं साथ ही यह भी कह रहे हैं कि अचानक हुए हमले से पुलिस कर्मियों को जवाबी फायरिंग का मौका नहीं मिला, नहीं तो दो-तीन शूटरों को आसानी से ही पुलिस कर्मी टपका देते।

उमेश पाल के साथ ही एक सिपाही की मौत 24 फरवरी को हो गई थी, जबकि दूसरे सिपाही की तबीयत खराब होने के बाद उसे पीजीआई तो ले जाया गया लेकिन वहां उन्हें बचाया नहीं जा सका। दोनों ही पुलिस कर्मियों की शहादत की चर्चा हर तरफ है। शनिवार को चौक क्षेत्र में भी दोनों सिपाहियों को शहादत को सलाम करते हुए तमाम व्यापारी यह कहते नजर आए कि उमेश पाल पर शूटरों ने अचानक हमला बोल दिया। ऐसा लगता है कि उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों को जरा भी संभलने का मौका नहीं मिला। अगर आमने सामने की टक्कर होती तो पुलिस कर्मी अपनी कार्बाइन से दो-तीन लोगों को तो आसानी से अपने निशाने पर ले लेते।
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