प्रयागराज से गोरखपुर का सफर अब छोटा हो जाएगा। इस पूरे रूट पर शीघ्र ही इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। इस महत्वपूर्ण रूट पर अभी हाल ही में हुए विद्युतीकरण का निरीक्षण सोमवार को रेल संरक्षा आयुक्त पूर्वोत्तर परिक्षेत्र मोहम्मद लतीफ खान द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने स्पीड ट्रायल भी लिया। अब उनकी ओके के बाद प्रयागराज से वाराणसी होते हुए गोरखपुर तक इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। इस दौरान अब इस पूरे रूट पर डीजल की जगह इलेक्ट्रिक इंजन लगाने की जरूरत नहीं होगी।
प्रयागराज-गोरखपुर रूट पर चौरीचौरा एक्सप्रेस, काशी एक्सप्रेस, नौतनवा एक्सप्रेस आदि ट्रेनों का संचालन होता है। इन सभी ट्रेनों में डीजल इंजन की अदला बदली के कारण गोरखपुर का सफर नौ से दस घंटे में हो पाता है। प्रयागराज से वाराणसी के बीच विद्युतीकरण का कार्य पिछले वर्ष ही हो चुका था, लेकिन वाराणसी से गोरखपुर के बीच भटनी-औंड़िहार रेल खंड पर 125 रूट किलोमीटर का काम बाकी था। यह कार्य कोरोना काल के दौरान पूरा कर लिया गया। यह कार्य पूरा होने के बाद गोरखपुर-वाराणसी-प्रयागराज के बीच अब इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेनों का संचालन पूरा हो जाएगा।
सोमवार को इस रूट पर रेल संरक्षा आयुक्त ने औड़िहार तक निरीक्षण किया। इसके बाद शाम पांच बजे पूरी गति से औड़िहार-भटनी रेल खण्ड पर विद्युत इंजन का स्पीड ट्रायल किया गया। एनईआर वाराणसी मंडल के पीआरओ अशोक कुुमार ने बताया कि अब रेल संरक्षा आयुक्त की हरी झंडी मिलते ही संबंधित रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।
उम्मीद है कि इस माह के आखिर या सितंबर माह की शुरूआत में यहां इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेनों की शुरूआत हो जाएगी। ऐसा होने के बाद प्रयागराज से गोरखपुर अधिकतम सात घंटे में पहुंचा जा सकेगा। निरीक्षण के दौरान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण रामकरण यादव, प्रमुख मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्रीकान्त सिंह, मुख्य संरक्षा अधिकारी एस.एन.साहू आदि अफसर मौजूद रहे।