आईएसआई से कनेक्शन और प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थानों पर विस्फोट की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मुस्लिम युवकों के मामले में पीपुल यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने युवकों की गिरफ्तारी को गलत बताया है। कहा है कि उसमें न्यायिक प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया है। ऐसे में एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई में सत्यता कम कहानी ज्यादा लग रही है। संगठन ने मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
पीयूसीएल के सचिव मनीष सिन्हा ने बताया कि युवकों के आतंकी कनेक्शन मामले की हकीकत पता लगाने के लिए पीयूसीएल ने वरिष्ठ अधिवक्ता केके राय, अधिवक्ता सीमा आजाद, चार्ली प्रकाश, सोनी आजाद की टीम गठित की। टीम में बतौर सदस्य वह खुद भी शामिल रहे। इसके बाद तारिक और जीशान के घर वालों से मुलाकात की गई और सही तथ्यों की जानकारी की गई। टीम के सदस्यों ने कहा कि गिरफ्तार लोगों पर 10 सितंबर को एफआईआर दर्ज की गई।
विस्फोटक के प्रकार का नहीं है जिक्र
उस एफआईआर में न तो नाम का उल्लेख है और न ही जगह का। फि र एटीएस ने आरोपितों की सही शिनाख्त कैसे की! यह समझ से परे है। एफआईआर में विस्फोटक पाए जाने, उसके स्थान और उसके प्रकार का कोई जिक्र नहीं है। फिर नैनी स्थित पोल्ट्री फार्म में ही विस्फोटक पदार्थ की बात कैसे सामने आई।
गिरफ्तार युवक शाहरुख ने अपने वीडियो में 12 या 13 सितंबर को किसी बाक्स में रखने की बात कही है, फिर यह 10 सितंबर की एफआईआर में यह बात कैसे दर्ज हो सकती है? एटीएस ने मीडिया के सामने विस्फोटक सामग्रियों को प्रदर्शित भी नहीं किया जैसा कि वह दूसरे मामलों में करती है। संगठन ने गिरफ्तार युवकों के पाकिस्तान कनेक्शन सहित अन्य तथ्यों पर सवाल खड़े किए हैं और मामले की जांच किसी न्यायाधीश से कराने की मांग की है।