तीन दिन तक लगातार जमा कराई रकम
इस बार कॉल पर आने वाला खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया। कहा कि इस केस के बारे में वह किसी को कुछ न बताएं क्योंकि यह केस बहुत संगीन है इसमें बैंक और सरकारी कर्मचारी भी लिप्त हैं। उसने कुछ दिन के लिए अपने कमरे में ही रहने व बाहर न निकलने की सलाह दी। कहा कि वह लगातार उनके अफसर के साथ वीडियो सर्विलांस में रहेंगे। ऐसा न करने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
इसके बाद भुक्तभोगी सॉफ्टवेयर इंजीनियर को रात भर वीडियो सर्विलांस पर रहना पड़ा। 22 जुलाई को सुबह नौ बजे 68 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से फ्लाई बाई नाम के इंडसइंड नासिक शाखा के खाते में जमा करा लिए। फिर 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के फर्जी ऑर्डर के नाम पर एचडीएफसी बैंक के खाते में 13.50 लाख रुपये जमा कराए। 24 जुलाई को फिर 16.50 लाख रुपये जमा करा लिए। डीसीपी नगर दीपक भूकर ने बताया कि शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच शुरू कर दी गई है।
जनपद में तीसरा मामला
डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का यह जनपद में तीसरा मामला है। मई में जार्जटाउन निवासी सेवानिवृत्त आईएफएस की पत्नी काकोली दास गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट कर 1.48 लाख की ठगी की गई थी। दूसरे मामले में कैंट में मायके आई जयपुर क ऋचा जैन को डिजिटल अरेस्ट कर 3.57 लाख रुपये ठग लिए गए थे।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
- साइबर अपराधी पहले शिकार को मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी जैसे मामलों में केस दर्ज होने की बात कहकर डराते हैं।
- उनकी बातों में कोई फंस जाता है तो वह मामला खत्म करने के नाम पर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी से बात कराने का झांसा देकर अपने ही गिरोह के किसी सदस्य से वीडियो कॉल पर बात कराते हैं।
- उस व्यक्ति को इतना डराया व धमकाया जाता है कि वह घबरा कर उनकी बात मानने को मजबूर हो जाए।
- साथ ही फंसने का डर दिखाकर किसी से संपर्क करने, कॉल करने या घर से बाहर निकलने से भी मना कर दिया जाता है।
- इसके बाद अलग-अलग खातों में रकम जमा करा ली जाती है।