संवाद न्यूज एजेंसी प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्लोरोफॉर्म सुंघाकर महिला संग दुष्कर्म करने के आरोपी रविंद्र सिंह की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट चिकित्सा न्याय सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि क्लोरोफॉर्म सूंघा कर शारीरिक संबंध बनाने की कहानी भरोसे लायक नहीं लगती। यह आरोप काल्पनिक कहानी जैसी लगती है।
यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने आरोपी की जमानत अर्जी पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक अनुभवहीन व्यक्ति के लिए बिना किसी व्यवधान के सो रही महिला को बेहोश कर देना बेहद असंभव है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि "पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली कहानी जिसमें एक महिला के चेहरे पर क्लोरोफॉर्म में भिगोए गए रूमाल को रखकर उसे अचानक बेहोश कर दिया गया और फिर उसके साथ बलात्कार किया गया, उस पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। "न्यायमूर्ति पहल ने जेपी मोदी की मेडिकल ज्यूरिसप्रूडेंस एंड टॉक्सिकोलॉजी का हवाला देते हुए कहा कि "जागते समय किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उसे बेहोश करना असंभव है। इसलिए आरोपी जमानत का हकदार है। उसे जमानत पर रिहा किया जाए।