दूसरों के नाम पर लेता था सिम
सूत्रों के मुताबिक, फरारी के दौरान उसने अपने करीबियों से संपर्क में रहने के लिए जिन सिमों का इस्तेमाल किया, उनमें से एक भी उसके नाम का नहीं है। वह दूसरों की आईडी पर लिए लिए सिम से अपने जानने वालों को संपर्क करता था। इसके लिए वह करीबियों व परिचितों की मदद लेता था और कई बार सिम बेचने वाले एजेंटों को ज्यादा पैसों का लालच देकर उनसे सिम ले लेता था। यही वजह रही कि तमाम कोशिशों के बावजूद उसने पुलिस को पांच साल तक छकाए रखा।
मुंबई, एमपी में काटा फरारी का ज्यादातर वक्त
आसिफ ने पूछताछ में यह भी बताया है कि उसने फरारी के बाद से अलग-अलग शहरों में फरारी काटी। दुबई से लौटने के बाद वह काफी वक्त तक मुंबई में रहा। इसके बाद वह एमपी के उज्जैन चला आया और यहां काफी वक्त बिताया। यहां से वह मुंबई भी आता-जाता रहा। करीब छह महीनों से वह शहडोल में रहने लगा था।
उसी की कंपनी के कर्मचारी और एक लाख के इनामी जसीम ने शहडोल में ठिकाना बनाने में उसकी मदद की। जसीम की ससुराल शहडोल में है और फरारी के दौरान उसके भी वहां पहुंचने की खबर पुलिस टीमों तक पहुंची थी। जिसके बाद जनपदीय एसओजी की टीम ने वहां दबिश भी दी थी। लेकिन वह नहीं मिला।