भारतीय संस्कृति और गांव की सत्ता ने देश को कभी गुलाम नहीं होने दिया। अंग्रेजों ने इसीलिए इन दोनों पर प्रहार किया। अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से संस्कृति को तथा नई बंदोबस्त प्रणाली के माध्यम से ग्राम स्वराज्य को समाप्त किया। इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक आजादी पाने के लिए नहीं लड़ा गया था। स्वाधीनता की लड़ाई स्वत्व के जागरण की लड़ाई थी।
स्वत्व का जागरण करना ही अमृत महोत्सव अभियान का मुख्य प्रयोजन है। कार्यशाला में इसके पूर्व सह प्रांत कार्यवाह डा राज बिहारी ने वक्ताओं को संगठनात्मक विषयों की जानकारी देने के साथ अमृत महोत्सव अभियान की रूपरेखा बताई। इस अवसर पर सह विभाग कार्यवाह घनश्याम, डॉ. एमजे त्रिपाठी, प्रोफेसर सत्यपाल, प्रो.एसपी सिंह , अमित पांडेय, विभाग प्रचारक डॉ. पीयूष आदि मौजूद रहे।