मेडिकल कॉलेज में बुलाकर एमबीबीएस दाखिले के नाम पर 17 लाख की ठगी में अहम खुलासा हुआ है। पता चला है कि इस धोखाधड़ी को अंजाम नोएडा के ठग गिरोह ने दिया था। जिसके दो सदस्य चार महीने पहले ही नोएडा से जेल भेजे जा चुके हैं। जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। मामले की जांच में जुटी कोतवाली पुलिस ने इस मामले में नोएडा पुलिस से संपर्क किया है।
मुंबई निवासी सुरेंद्र यादव ने छह जून को कोतवाली में मामले से संबंधित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि एमबीबीएस सीट पर बेटी के दाखिले के नाम पर उनसे मेडिकल कॉलेज बुलाकर 17 लाख की ठगी की गई। उन्होंने कुल पांच लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई, जिनमें सचिन सिंह, आदर्श व पंकज कुमार खटिक शामिल हैं। कोतवाली पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
उधर पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, ठगी की यह वारदात नोएडा के उस गिरोह ने अंजाम दी जिसके दो सदस्य इसी साल मार्च में जेल भेजे जा चुके हैं। इस गिरोह ने न सिर्फ सुरेंद्र बल्कि बरेली निवासी रिटायर शिक्षक गोवर्धन लाल श्रीवास्तव से भी पौत्र व पौत्री का एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर 34 लाख की ठगी की थी। उन्हें भी सुरेंद्र की तरह मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी डिपार्टमेंट में बुलाकर फर्जी काउंसलिंग कराई गई ताकि किसी तरह का शक न हो। कोतवाली में दर्ज मामले में नामजद पंकज खटिक, आदर्श व सचिन सिंह भी इसी गिरोह के सदस्य हैं, जो रिटायर शिक्षक से ठगी में भी नामजद थे।
इस गिरोह के खिलाफ नोएडा में भी चार मामले दर्ज हैं। इसी साल मार्च मेें पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों सुनील सिंह व राज विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जबकि पंकज खटिक व आदर्श इससे पहले ही पुराने मामले में सरेंडर कर जेल चले गए थे। कस्टडी रिमांड में उनसे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर सुनील व राज विक्रम पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ के बाद खुलासा हुआ था कि यह गिरोह नोएडा ही नहीं बल्कि कई जनपदों में एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर ठगी की वारदातें अंजाम दी हैं। मामले में पुलिस अफसरों का कहना है कि कुछ अहम क्लू मिले हैं। नोएडा के एक गिरोह के बारे में पता चला है, जिसके संबंध में नोएडा पुलिस से संपर्क किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी भी हैं शामिल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी के इस रैकेट में मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। दरअसल नोएडा में पकड़े जाने के बाद गिरोह के सदस्यों सुनील व राज ने बताया था कि फरार साथी सचिन ने लाखों रुपये देकर मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों को भी इस खेल में शामिल कर लिया था। जो काउंसलिंग खत्म होने के बाद शाम के वक्त विभागीय कक्षों की चाबियां उन्हें सौंप देते थे। जिसके बाद वह खुद को प्रोफेसर व अन्य अफसर बताकर लोगों को झांसे में लेते थे। खुद सुनील व राज विक्रम ने बरेली निवासी रिटायर शिक्षक व उसके परिजनों को इसी तरह मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज बुलाकर ठगी की थी।