पुलिस कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को राखी बांधतीं पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी।
- फोटो : अमर उजाला।
शुभ योग में मनाया गया भाई-बहन का त्योहार
रक्षाबंधन पर सोमवार को इस बार पंच महायोग का संयोग रहा। सोमवार को रवि योग, शश राजयोग, शोभन योग, बुधादित्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, शुक्रादित्य योग और लक्ष्मी नारायण योग का मिलन का योग बना। सावन के आखिरी सोमवार के साथ सावन की पूर्णिमा का संयोग इस पर्व को और भी खास बना दिया। सुबह से 10 घंटे तक भद्राकाल रहा। दोपहर 1.24 बजे के बाद शुभ मुहूर्त में राखियं बांधी गईं।
कौशाम्बी में भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन।
- फोटो : संवाद
ज्योतिषाचार्य डॉ. बर्जेंद्र मिश्र के अनुसार शनि अपनी स्वराशि कुंभ में विराजमान रहेंगे तो सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेंगे। इस बार रक्षाबंधन का समय व मुहूर्त भी खास है। मान्यता के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित माना गया है। इस काल में रक्षाबंधन को अशुभ और अकल्याणकारी बताया गया है। पंचांग के अनुसार सोमवार की दोहपर 1.24 बजे तक भद्राकाल है। इसलिए सोमवार को 1.25 बजे के बाद ही रक्षा बंधन मनाया जाएगा।
रक्षाबंधन का मुहूर्त दोपहर बाद से रात 12.28 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार रविवार की रात 2.21 बजे से सोमवार को दिन 1.24 बजे तक भद्रा है। ऐसे में भद्रा के बाद ही रक्षांबधन का पर्व मनाया गया। भद्रा में श्रावणी, रक्षाबंधन और होलिका दहन नहीं होता। इस बार रक्षाबंधन पर्व पर सोमवार को सुबह से लगातार 10 घंटे तक भद्राकाल रहा। ऐसे में बहनों को शुभ मुहूर्त के लिए इंतजार किया। प्रदोष काल में शाम 6:56 से रात 9:08 बजे तक राखी बांधी जा सकेंगी।