मौत के बाद भी तारीख पर तारीख
पहली जीत से उत्साहित पूजा पाल ने अतीक के भाई अशरफ को 27 मार्च 2005 को मिली जमानत को चुनौती दी। 7 नवंबर 2016 को दाखिल याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति मोहम्मद ताहिर ने की, लेकिन सुनवाई से पहले ही कोर्ट ने इसे अन्य पीठ में सूचीबद्ध करने का आदेश दे दिया। इसके बाद न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा की कोर्ट ने 29 मई 2017 को अशरफ को नोटिस भेजा। तब से बस तारीखें ही मिल रही हैं। 15 अप्रैल 2023 को अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या के बाद यह अर्जी निरर्थक हो चुकी है। लेकिन, कोर्ट की अधिकारिक वेबसाइट पर यह अर्जी आज भी लंबित है। 16 फरवरी 2024 को भी यह केस सूचीबद्ध हुआ था।
जमानत निरस्त का मामला अटका, अपहरण में गुर्गा गया जेल
पूजा पाल ने अतीक के गुर्गे दिनेश पासी की जमानत निरस्त कराने के लिए तीसरी अर्जी 28 अक्टूबर 2017 को दाखिल की। दिनेश राजू पाल हत्याकांड में नामजद नहीं था। सीबीसीआईडी ने गवाह गोरे लाल के बयान के आधार पर उसका नाम शामिल किया था। गिरफ्तारी के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 28 दिसंबर 2012 को उसे जमानत दे दी थी। पूजा की अर्जी पर कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2017 को दिनेश पासी को नोटिस भेजा। फिर, तारीखें कई लगीं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अप्रैल 2023 में उमेश पाल के अपहरण में दोषी मिलने के बाद से वह जेल में है। हालांकि, मामला अभी भी लंबित है। आखिरी बार यह केस 22 फरवरी-24 को सूचीबद्ध किया गया था।
हत्याकांड में सजा हो गई, जमानत पर निर्णय नहीं
राजू पाल हत्याकांड में आरोपी आबिद की जमानत निरस्त कराने के लिए भी पूजा पाल ने 28 अक्तूबर 2017 को अर्जी हाईकोर्ट में दाखिल की थी। इस मामले में दावे-प्रतिदावे 2023 और 2024 में दाखिल हुए। इस प्रकरण की सुुनवाई के लिए अभी तक 19 तारीखें पड़ीं, लेकिन जमानत अर्जी पर निस्तारण नहीं हो सका। हालांकि, शुक्रवार को सीबीआई लखनऊ की विशेष अदालत ने आबिद को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी है। पर, जमानत का प्रकरण जस का तस है।