सीनियर आईएएस अधिकारी राजीव कुमार को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजे जाने के बाद अब उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। राजीव कुमार को सीबीआई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ उनकी अपील हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद उनको जेल भेज दिया गया है। पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलिया एफ रिबेरो और कई पूर्व आईएएस अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राजीव कुमार को सिविल सर्विसेज से बर्खास्त करने की मांग की है।
याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति आरके कक्कड़ ने प्रदेश सरकार को इस मामले में दस दिन में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। सरकार से पूछा है कि राजीव कुमार को जेल भेजे जाने के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। याचिका पर दो मई को सुनवाई होगी। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद राजीव कुमार को न्यायालय में सरेंडर करने का आदेश दिया जाए, मगर इससे पूर्व ही राजीव सरेंडर कर जेल भेजे जा चुके हैं। दूसरी प्रार्थना उनको सेवा से बर्खास्त करने की है। इस पर बल देते हुए अधिवक्ता सतीश चतुर्वेदी ने कहा कि सजायाफ्ता अधिकारी के खिलाफ नियम 14(1) में कार्रवाई की जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है नोएडा में तैनाती के दौरान पूर्व आईएएस नीरा यादव और राजीव कुमार पर प्लाटों के आवंटन में घोटाला करने का आरोप लगा था। दोनों को सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन-तीन वर्ष कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके खिलाफ अपील दाखिल की गई थी, जिसे जस्टिस हर्ष कुमार ने 24 फरवरी 2016 को खारिज कर दी थी। राजीव कुमार ने सुप्रीमकोर्ट की शरण ली, मगर उनको वहां भी राहत नहीं मिली। सुप्रीमकोर्ट ने सरेंडर के लिए कहा था। इसके बाद राजीव कुमार ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था, जहां से उनको जेल भेज दिया गया है।