परीक्षा की हर प्रक्रिया के लिए हाेगी अलग-अलग एजेंसी
पूरी परीक्षा की व्यवस्था एक एजेंसी के पास नहीं होगी। इसके लिए चार अलग-अलग एजेंसियों का चयन किया जाएगा। एक एजेंसी पेपर तैयार करने, छपवाने तथा सभी जिलों के कोषागार तक पहुंचाने का काम करेगी। दूसरी एजेंसी के पास परीक्षा संपन्न कराएगी। यानी, कोषागार से परीक्षा केंद्रों तक पेपर पहुंचाने, केंद्र की व्यवस्था तथा परीक्षा के बाद ओएमआर शीट को आयोग तक पहुंचाने का काम होगा। तीसरी एजेंसी के पास परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था होगी। चौथी एजेंसी के पास ओएमआर शीट की स्कैनिंग तथा अभ्यर्थियों के प्राप्तांक आयोग को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होगी। यह काम आयोग परिसर में ही होगा।
एक पाली में अधिकतम पांच लाख अभ्यर्थियों की होगी परीक्षा
शासन की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार किसी भर्ती में चार लाख से अधिक आवेदक हैं तो दो स्तरीय परीक्षा होगी। यानी, एक स्क्रीनिंग परीक्षा होगी। इसके अलावा एक पाली में अधिकतम पांच लाख अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। पांच लाख से अधिक अभ्यर्थी हैं तो उसी के अनुसार परीक्षा पालियों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। पांच लाख से कम अभ्यर्थियों की स्थिति में भी आयोग एक से अधिक पालियों में परीक्षा करा सकता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस भर्ती परीक्षा में यह शर्त लागू नहीं होगी।
चार लाख से अधिक अभ्यर्थी तो मुख्य सचिव लेंगे बैठक
किसी भर्ती परीक्षा में चार लाख से अधिक अभ्यर्थी हैं तो एग्जाम से पहले मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के स्तर पर बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसमें भर्ती आयोग के अध्यक्ष भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा मंडल और जिला स्तर पर भी बैठक होगी।
अफवाहों का तत्काल खंडन करेगा आयोग
भर्ती परीक्षाओं से पहले या परीक्षा के दौरान पेपर आउट होने एवं अन्य तरह की अफवाहें भी खूब उड़ती हैं। इससे परीक्षा सवालों में घेरे में आ जाती है, जिससे भर्ती आयोग की गरिमा को भी ठेस पहुंचती है। इससे बचने के लिए गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि आयोग की ओर से किसी अफवाह का तत्काल खंडन किया जाएगा। इसके अलावा आयोग के अफसर एसटीएफ एवं पुलिस के अधिकारियों के लगातार संपर्क में रहेंगे। परीक्षा केंद्र स्थापित कर वहां से निगरानी भी रखेगी जाएगी।