लोक निर्माण विभाग में सेवा पुस्तिका की जांच में कई नए तरह की धांधली सामने आ रही हैं। एक कर्मचारी नेता ने अपनी ज्वाइनिंग के समय अपनी शैक्षिक योग्यता पांच पास दिखाई थी लेकिन उसके बाद वह कागजों में हेराफेरी कर अपनी पदोन्नति लैब सहायक के पद पर करा ली है। कर्मचारी नेता के खिलाफ शिकायत हो गई है। मामले में निर्माण खंड एक के अधीशासी अभियंता को पत्र लिखकर जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
विभागीय जानकारी के मुताबिक कर्मचारी नेता चौकीदार के पद पर नियुक्ति हुए थे। उस समय उनकी शैक्षिक योग्यता कक्षा पांच थी। बाद में स्थाई मास्टर रोल में होने के लिए बेलदार के पद पर पद परिवर्तित करा लिया। तथा, बेलदार के पद पर स्थाई अधिष्ठान में नियुक्त हो गए। पद परिवर्तन कराने के फलस्वरूप कर्मचारी नेता ज्येष्ठता सूची से कनिष्ठ कर्मचारी हो गए। जिस समय सेवा में आए उस समय जनपदीय ज्येष्ठता सूची में अंकित जन्मतिथि के अनुसार 18 वर्ष, छह माह के थे। इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब ये कक्षा पांच ही पास थे तो ज्येष्ठता, श्रेष्ठता और योग्यता की अनदेखी करते इनकी पदोन्नति लैब सहायक के पद पर कैसे हो गई है? जबकि विभागीय पदोन्नति के लिए एक मानदंड बनाया गया है।
पदोन्नति नोडल अधिकारी की अध्यक्षता (चार अधीशासी अभियंताओं की कमेटी) में एक चयन चार्ट बनता है और उस पर कमेटी के सभी अधिशासी अभियंताओं के हस्ताक्षर करके अधीक्षण अभियंता के कार्यालय भेजा जाता है। लेकिन, इन सब कार्यवाहियों की अनदेखी हुई है। जांच में यह भी बात सामने आई है कि कर्मचारी नेता की सेवावधि में एक साल का गैप है। उन्हें एक साल, 13 दिन का वेतन आहरित नहीं हुआ है। जांच में कर्मचारी नेता की पूरी हकीकत सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। कर्मचारी नेता के खिलाफ बीजेपी के मंडल अध्यक्ष दिलीप कुमार केसरवानी ने मुख्य अभियंता से शिकायत कर जांच की मांग की है। मामले में निर्माण खंड एक से जांच कर कार्रवाई करने को कहा गया है।