सेमिनार, कांफ्रेंस आदि में शामिल होने के लिए इविवि के प्रो. मो. शाहिद कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। एक बार बिना सूचना दिए विदेेश जाने पर उनका वेतन भी रोक दिया गया था।
जेएनयू, नई दिल्ली के छात्र रहे प्रो. शाहिद ने वर्ष 1988 में लेक्चरर के रूप में इविवि ज्वाइन किया था। 2004 में वह रीडर बने और 2015 में प्रोफेसर के पद पर उनका प्रमोशन हो गया। हालांकि, उनके काम को लेकर कभी किसी ने अंगुली नहीं उठाई। इविवि के शिक्षकों का कहना है कि वह हमेशा समय से पाठ्यक्रम पूरा करा देते हैं और अनुशासन के भी पक्के हैं।
साउथ एशियन पॉलिटिकल सिस्टम, इंटरनेशनल रिलेशंस, इस्लामिक पॉलिटिकल थॉट, इस्लामिक डायसपोरा इन द वर्ल्ड जैैसे विषयों में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है और वह टर्की, सोमालिया, बांग्लादेेश समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। वर्ष 2014 में भी वह विदेश यात्रा पर गए थे, लेकिन उन्होंने इविवि प्रशासन को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी थी, सो उनका वेतन रोक दिया गया था। इस बार भी उनकी एक गलती भारी पड़ गई। प्रोफेसर ने मरकज से लौटने की बात छिपा ली और इसकी वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा।