Prayagraj News : प्रयागराज पहुंची विजय मशाल यात्रा को सलामी देते सेना के अधिकारी।
- फोटो : प्रयागराज
शहीद दीनानाथ के गांव नहीं जा सकी स्वर्णिम विजय मशाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भेजी गई स्वर्णिम विजय मशाल रविवार को शहीद दीनानाथ यादव के गांव सुमेरुपुर नहीं जा सकी। इसी वजह विजय मशाल का सब एरिया में देरी से पहुंचना था। नियमत: स्वर्णिम मशाल जिस भी जिले में जाती है, वहां सबसे पहले सब एरिया में सेना के कमांडेंट उसे सलामी देते हैं। ऐसे में रविवार को मशाल सब एरिया पहुंचने और सलामी का कार्यक्रम पूरा होने में देर होने की वजह से डोगरा रेजीमेंट की सेना की बैंड को ही सुमेरुपुर के लिए रवाना किया जा सका।
रायबरेली के कृष्ण बिहारी ने गढ़ी दीनानाथ की प्रतिमा
झूंसी। शहीद दीनानाथ के भाई त्रिलोकीनाथ ने बताया कि मंदिर तीन साल में बनकर तैयार हुआ है। मंदिर में स्थापित की गई शहीद दीनानाथ की प्रतिमा को कृष्ण बिहारी ने तीन साल में तैयार किया। इस मंदिर के निर्माण पर चार लाख रुपये परिवार के लोगों ने ही अपनी कमाई से खर्च किए। संयोजन शहीद दीनानाथ के भतीजे दशरथ लाल यादव ने किया।
Prayagraj News : स्वर्णिम विजय मशाल प्रयागराज पहुंचने पर स्वागत करते सैनिक।
- फोटो : प्रयागराज
हैंड ग्रेनेड फेंकते समय सीने पर दुश्मन की गोली खाकर शहीद हुए थे दीनानाथ
जाकीगंज को पाकिस्तान के कब्जे से खाली कराने के लिए हैंडग्रेनेड फेंकते समय भारत माता के सपूत दीनानाथ यादव अपने सीने पर दुश्मन की गोली खाकर शहीद हो गए थे। सेवानिवृत्त फौजी शिव शंकर यादव ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में दीनानाथ के पराक्रम की कहानी सुनाई तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
सेवानिवृत्त फौजी ने सेना की ओर से जारी दीनानाथ की वीरता को पढ़कर सुनाया। उन्होंने जाकीगंज को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना ने उस इलाके की घेराबंदी की थी। 21 नवंबर 1971 की भोर में ब्रिगेडियर रघुवीर सिंह के नेतृत्व में आपरेशन जाकीगंज शुरू हुआ। तीन बजे भोर से भारतीय सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान दुश्मन देेश की सेना के कई सिपाई झुरमुटों में और गड्डों में छिपे हुए थे।
दीनानाथ यादव जिस टुकड़ी में थे उसमें कुल आठ जवान लेटते हुए गोलीबारी कर रहे थे। उसी दौरान दीनानाथ को सौ मीटर दूर झुरमुट में पत्ते और डालियां हिलती दिखाई पड़ीं। इस पर दीनानाथ ने ब्रिगेडियर रघुवीर को इसकी जानकारी दी और उस पर लक्ष्य साधने की अनुमति भी मांगी। ब्रिगेडियर का आदेश मिलते ही दीनानाथ ने झुरमुट पर हैंडग्रेनेड दागा, लेकिन उधर से दुश्मन की चलाई गई गोली उनके सीने को पार कर गई। इस दौरान दीनानाथ मौके पर ही शहीद हो गए। लेकिन, तीन बजे भोर से सुबह छह बजे तक तीन घंटे की गोलीबारी में भारतीय सेना ने जाकीगंज को पाकिस्तान के कब्जे से खाली कराकर जीत लिया। इस युद्ध में भारतीय सेना के दीनानाथ समेत तीन जवान शहीद हुए थे, जबकि पाकिस्तानी सेना के 92 जवानों को मार गिराया गया था।