ज्योतिष्पीठ और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य रहे स्वामी स्वरूपानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद पहली बार उनके उत्तराधिकारियों ने माघ मेले में अलग-अलग शिविर लगाने का प्रस्ताव प्रशासन को दिया है। मेला प्रशासन को इसके लिए दोनों पीठों के शंकराचार्यों की ओर से पत्र भेजा गया है। इससे पहले त्रिवेणी मार्ग पर दोनों पीठों के शिविर एक ही साथ लगते रहे हैं। इस बार माघ मेला में बसने के लिए द्वारका पीठ के शंकराचार्य ने ज्योतिष्पीठ के बराबर भूमि -सुविधाएं मांगी है।
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद ने मेलाधिकारी को पत्र लिखकर दोनों पीठों के लिए अलग-अलग भूमि सुविधाएं आवंटित करने के लिए कहा है। पत्र में कहा गया है कि स्वामी स्वरूपानंद ज्योतिष्पीठ और द्वारका दोनों के ही शंकराचार्य थे। इसलिए माघ मेला, कुंभ मेला में दोनों पीठों के शिविर एक साथ ही लगते थे। लेकिन, अब उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी जगह दोनों पीठों पर अलग-अलग आचार्यों को शंकराचार्य के रूप में अभिसिक्त कर दिया गया है।
मेला प्रशासन को बताया गया है कि द्वारका पीठ पर स्वामी सदानंद और ज्योतिष्पीठ पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नए शंकराचार्य के तौर पर विराजमान हो चुके हैं। इस बार दोनों शंकराचार्यों ने माघ मेला में अलग-अलग शिविर लगाने के लिए सहमति बनाई है। ऐसे में दोनों पीठों के लिए अलग-अलग भूमि सुविधाएं आवंटित करने के लिए आग्रह किया गया है। ज्योतितष्पीठ के बद्रिकाश्रम हिमालय शिविर के नाम पर ही भूमि सुविधाएं मिलती रही हैं।
अब जब द्वारका शारदा पीठ का शिविर अलग से लगाया जाएगा तब भूमि की आवश्यकता अधिक होगी। निजी सचिव सुबुद्धानंद ने इसके लिए ज्योतिष्पीठ के ही बराबर भूमि द्वारका पीठ को भी आवंटित करने के लिए कहा है। द्वारका -शारदा पीठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी श्रीधरानंद ने कुंभमेलाधिकारी विजय किरन आनंद से मिलकर इस पर चर्चा भी की है। श्रीधरानंद के मुताबिक दौ सौ फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा घेरा में द्वारका पीठ को भूमि मिलती रही है। जबकि ज्योतिष्पीठ को दो सौ फीट लंबा और दो सौ फीट चौड़ा घेरा मिलता है। ऐसे में अब अलग शिविर होने पर द्वारका शारदा पीठ को भी दो सौ फीट लंबा और दो सौ फीट चौड़ा टिन घेरा के साथ भूमि सुविधाएं मिलनी चाहिए।