तीसरे प्रयास में फंसा पुलिस के चंगुल में
पहले एजुकेशन रिसर्च डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर विज्ञापन निकाला। इससे उसने पांच लाख रुपये कमाए। फिर सीआरडीओ के नाम फर्जी वेबसाइट बनाकर विज्ञापन निकाला और लगभग 55 लाख रुपये कमाए। इस फर्जी वाड़ा की कि सी को भनक तक नहीं लगी। इससे उसका हौसला बढ़ गया। सचिन ने फिर यूपी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई और विज्ञापन निकाला।
इसके लिए लाखों की संख्या में अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। ऐसे में शातिरों को करोड़ों की कमाई का अनुमान था, लेकिन इससे पहले ही वे पुलिस के शिकंजे में फंस गया। इनके कब्जे से पुलिस ने दो लैपटॉप, एक टैबलेट, पेन ड्राइव, वेबसाइट से संबंधित कूटरचित दस्तावेज, आवेदन करने वाले 567 अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र, आवेदन शुल्क के दो लाख 17 हजार रुपये आदि बरामद हुए हैं।