सेंट्रल जेल नैनी का एक कोरोना संक्रमित कैदी शनिवार को दोपहर में स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के कोविड-19 वार्ड के शौचालय की खिड़की तोड़कर फरार हो गया। उसके खिलाफ शहर कोतवाली में फरारी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। उसकी सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस विभाग के दोनों सिपाहियों के खिलाफ जांच चल रही है।
सराय ममरेज थानांतर्गत अनुआ गांव निवासी सुशील भारतीया पुत्र कल्लू भारतीया को फूलपुर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार करके एक सितंबर को नैनी सेंट्रल जेल भेजा था। उस पर चोरी एवं डकैती के सामान को ठिकाने लगाने का आरोप था। जेल में दाखिल करने से पहले उसका कोविड 19 टेस्ट हुआ था, जिसमें वह कोरोना पाजिटिव पाया गया था। उसे जेल में बने कोविड 19 हेल्थ सेंटर में रखा गया था।
पांच सितंबर को सुबह करीब दस बजे वह अचानक हेल्थ सेंटर परिसर में ही गिर गया। उसके मुंह से झाग निकलने लगा था। हेल्थ सेंटर में मौजूद चिकित्सक ने उसे स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) रेफर कर दिया। एसआरएन में उसे कोविड 19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों के मुताबिक करीब 2.25 बजे वह अपनी बेड से उठकर वार्ड के अंदर ही बने शौचालय में गया था। उसके बाद लौटा नहीं। जब सिपाहियों ने शौचालय जाकर देखा तो पता चला कि कैदी शौचालय की खिड़की तोड़कर फरार हो चुका था। उसके बाद कंट्रोल रूम व जेल प्रशासन को सूचना दी गई। चौतरफा खोजबीन शुरू हुई लेकिन कुछ पता नहीं चला।
दो बार पुलिस अभिरक्षा से भी भाग चुका है सुशील
जेल के अंदर स्थित कोविड 19 हेल्थ केयर सेंटर में सुशील भारतीया के आस-पास रहने वाले कैदियों के साथ-साथ जेल कर्मियों को भी ये पता था कि वह बहुत ड्रामेबाज है। अगर जेल से बाहर गया तो वह निश्चित भाग जाएगा लेकिन उसकी हालत देखकर अधिकारी भी सहम गए और मजबूरी में उसे एसआरएन अस्पताल भेजना पड़ा। जहां से वह फरार हो गया। बताते चलें कि सुशील भारतीया चार सितंबर की शाम को अचानक गिनती के दौरान गायब पाया गया था। जिससे जेल में हड़कंप मच गया कि कैदी भाग गया। घंटे भर चली जांच पड़ताल में वह शौचालय के टैंक के पीछे छिपा मिला था। इस संबंध में उसके खिलाफ नैनी कोतवाली में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। नैनी पुलिस के मुताबिक वह दो बार पुलिस अभिरक्षा से भी भाग चुका है। बहुत शातिर है।
कोरोना संक्रमित कैदियों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती
कोरोना संक्रमित कैदियों की सुरक्षा जेल एवं पुलिस प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है। कम से कम सुशील भारतीया ने फरार होकर सुरक्षाकर्मियों की इस कमजोरी को उजागर कर दिया है। कोई भी कोरोना संक्रमित चाहे जहां भर्ती हो, उसे न तो हथकड़ी लगाकर उसके पास सिपाही बैठ सकते हैं और न ही बिना हथकड़ी के, क्योंकि इसके लिए वार्ड में पहले तो घुसने की अनुमति नहीं होती है और अगर हो भी जाए तो सुरक्षा कर्मियों को हर समय पीपी किट पहनकर कैदियों की सुरक्षा में रहना पड़ेगा, जो संभव नहीं है। ये जेल प्रशासन भी मानता है कि कोरोना संक्रमित कैदियों की सुरक्षा चिंता का विषय है। दूसरी तरफ लेवल थ्री हास्पिटल एसआरएन में कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं काम कर रहा है कि उसके जरिए किसी कैदी की निगरानी रखी जा सके।
- कोरोना संक्रमित सुशील कुमार बहुत शातिर कैदी है। उसने जेल के अंदर भी चार सितंबर को छिपकर खलबली मचा दी थी। हम लोगों को डर था कि वह अस्पताल जाकर भी भागने की कोशिश करेगा। इसके लिए स्थानीय पुलिस चौकी व आला अधिकारियों को भी सूचित किया गया था। वार्ड के अंदर सुरक्षाकर्मी जा नहीं सकते। वार्ड का सीसीटीवी कैमरा भी काम नहीं कर रहा है। बाकी जांच की जा रही है। जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। -पीएन पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, नैनी सेंट्रल जेल, प्रयागराज