प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत रविवार को गंगा में सवा लाख मछलियों के बच्चे छोड़े गए। मछलियों के बच्चों को गंगा में छोड़े जाने का कार्यक्रम उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष रमाकांत निषाद की मौजूदगी में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गंगा नदी को निर्मल एवं स्वच्छ रखने के लिए जैव विविधता का संरक्षण जरूरी है।
इस अवसर पर मत्स्य संपदा योजना के तहत गोष्ठी भी हुई। गोष्ठी में रमाकांत निषाद ने कहा कि गंगा में मत्स्य संरक्षण के लिए आवश्यक है कि नदी में शिकार करने वाले मछुआरे एक किलोग्राम से छोटी मछलियों का शिकार न करें। इससे मछलियों की ब्रीडिंग अवधि जून से सितंबर तक गंगा नदी में प्राकृतिक प्रजनन के लिए हो सके।
मुख्य कार्यक्रम अधिकारी एसआर यादव ने कहा कि मछुआरों से यह भी अनुरोध किया गया कि वह मछलियों के प्रजनन काल जून से सितंबर तक गंगा नदी में भारतीय मेजर कार्प का शिकार न करें। अन्यथा गंगा में मछलियों की कमी होने पर मछुआरों की जीविका प्रभावित हो सकती है। इसके पूर्व गंगा में रोहू, कतला, नैन प्रजाति की मछलियों के बच्चों को छोड़ा गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि यह अभियान आठ अक्तूबर से शुरू हुआ। जो गंगा किनारे बसे शहर प्रयागराज, वाराणसी, बिजनौर, अमरोहा, बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, कानपुर, फतेहपुर, कौशांबी, मिर्जापुर और गाजीपुर में हो रहा है। इस अवसर पर भाजपा नेता पीयूष रंजन निषाद, डा. डीएन झा, अनिल कुमार गुप्ता, राजेश शर्मा, मुकेश कुमार सारंग, सिद्धूराम यादव, इरफानुल्लाह खान, शेषनाथ, शैलेंद्र सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम में 25 मत्स्य पालकों को प्रदर्शन किट का वितरण किया गया। इसके अलावा पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत 16 किसानों को अनुदान वितरण भी किया गया।