काफी विरोध के बाद रुका पाटने का कार्य
हालांकि काफी विरोध के पश्चात नाले को पाटना बंद कर दिया गया। इंजीनियर को ट्रैक्टर के सामने लेटते देख पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में बल प्रयोग करते हुए उक्त सिंचाई विभाग के एसडीओ अनिल कुमार यादव को वहां से हटाया गया। वह कई विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। उनका कहना है कि इस तरह से नाले को पाट दिया गया तो पूरा क्षेत्र बाढ़ के चपेट में आ जाएगा। वहीं पर मौजूद एक अधिवक्ता का कहना था कि जब बाढ़ आएगी तो उसका जिम्मेदार पूरा प्रशासन होगा।
ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति आक्रोश
प्राकृतिक नाले का बंद कर नए नाले के निर्माण को लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति काफी गुस्सा देखने को मिला। जिसमें संजय कुमार गुप्ता, रामहित गुप्ता, रामाधार द्विवेदी, अवधेश गुप्ता, हनुमान गुप्ता, रघुनाथ गुप्ता ,लक्ष्मी कांत मिश्रा, राजेश्वरी मिश्रा समेत सैकड़ों की संख्या ग्रामीण वहां मौजूद रहे और प्रशासन की मौजूदगी में हो रहे अवैध कार्य का विरोध करते रहे।
एसडीएम कोरांव ने मामले में जताई अनभिज्ञता
खपटिहा गांव में बुधवार सुबह पुलिस बल की मौजूदगी में ट्रैक्टर व जेसीबी लगाकर प्राकृतिक नाले का पाटने का काम शुरु हो गया था। जब इसके विरोध में ग्रामीण इकट्ठा हुए वहां मौजूद पुलिस कर्मी उन्हें समझाने में लग गए, लेकिन ग्रामीण उनकी बातों से संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। दोपहर एक बजे एसडीएम कोरांव अभिनव कनौजिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने मामले में किसी तरह की कागजी आदेश के संबंध में अनभिज्ञता जताई।
सिंचाई विभाग के एसडीओ अनिल कुमार यादव ने कहा कि मामले में सीआरपीसी 133 के तहत प्रकृति के बहाव को रोकना पूरी तरह गैरकानूनी है। उक्त में काफी जद्दोजहद के पश्चात एसडीएम ने नाले का पटना रुकवा दिया। वही कुछ पुराने नाले का खुदाई भी करवाया। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही नाले को पाटने का काम प्रारंभ हुआ था।
वहीं उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही नाले का पाटने का काम रोककर खुदाई का काम चालू किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि यदि प्राकृतिक नाले का पाट दिया गया तो क्षेत्र के जोरवट, खपटिहा, खीरी, पूरादतू, बहराइचा, बघोल, पाठकपुर समेत कई गांव में बरसात में बाढ़ की समस्या हो जाएगी।